चित्रकूट। सुख-समृद्धि की कामना को लेकर 16 दिन से चल रहा महालक्ष्मी व्रत शनिवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। रामघाट पर सुबह से ही महिलाएं पहुंचने लगीं और नदी के पानी पूजन किया। पुरोहितों से महालक्ष्मी व्रत की पौराणिक कथा और सोलह बोल की कहानी सुनी।
अश्विन कृष्ण अष्टमी पर महिलाओं ने उद्यापन के साथ हाथी पूजन किया। सुबह से ही रामघाट सहित शहर के मंदिरों में महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा कर मां लक्ष्मी से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। 19 सितंबर से शुरू हुए इस व्रत के अंतिम दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा-अनुष्ठान हुए।
व्रत के दौरान हाथ में बांधे गए 16 धागों और गांठों वाले पवित्र रक्षा सूत्र का भी विधि-विधान से पूजन किया गया। महिलाओं ने पूजा के बाद रक्षासूत्र को घर के धन स्थान या तिजोरी में सुरक्षित रखा। वहीं अभिजीत मुहूर्त में पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने हाथी पूजन किया।