फोटो 23 सीकेटीपी 16 मानिकपुर की खस्ताहाल कांशीराम कॉलोनी-संवाद
- फोटो : जगतजीत इंटर कॉलेज में अमर प्रकाश को मिठाई खिलाते प्रधानाचार्य।
मानिकपुर (चित्रकूट)। नगर पंचायत में गरीबों को सरकारी छत देने के लिए बनी कांशीराम कॉलोनी दस साल बाद भी अधूरी है। इस परियोजना पर सरकार ने 2200 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन एक भी गरीब को इसका लाभ नहीं मिल सका। आज यह कॉलोनी खंडहर में तब्दील हो चुकी है, जहां गंदगी का अंबार है और चोर खिड़की-दरवाजे उखाड़ ले गए हैं।
तत्कालीन बसपा सरकार ने वर्ष 2011-12 में मानिकपुर के खिचड़ी व राजापुर में 744 आवासों की स्वीकृति दी थी। इसमें से 336 आवास खिचड़ी में बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 2015-16 में ये आवास बनकर तैयार हो गए थे। इसके बाद किसी ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। कॉलोनी पूरी तरह से खंडहर में बदल चुकी है और रहने लायक नहीं बची है। पूरे परिसर में खरपतवार उगे हैं। बाउंड्री होने के बाद भी सभी कमरों के दरवाजे व खिड़की गायब हो गए हैं। अब बिना मरम्मत के यहां रहना असंभव है।
मानिकपुर व राजापुर में कांशीराम कॉलोनी के लिए 2200 लाख रुपये धनराशि स्वीकृत हुई थी। कार्यदायी संस्था उप्र आवास एवं विकास परिषद इकाई इलाहाबाद ने 1683 लाख रुपये खर्च किए। शेष 562 लाख रुपये वापस कर दिए गए थे। खिचड़ी की कांशीराम कॉलोनी का निर्माण पूरा होने के बाद वर्ष 2015 में नगर पंचायत मानिकपुर को हैंडओवर करने के लिए पत्र लिखा गया था। हालांकि, यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे सरकार के करोड़ों रुपये व्यर्थ हो गए।
स्थानीय निवासियों ने कार्यदायी संस्था की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आवासों का आवंटन न होने से गरीबों को कोई लाभ नहीं मिला। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कॉलोनी की खराब स्थिति की जानकारी मिलने की बात कही है। उन्होंने पूरी जानकारी मांगी है और गड़बड़ी सही कराकर आवासों के आवंटन का आश्वासन दिया है। जिलाधिकारी ने दरवाजे खिड़की चोरी होने की जानकारी न होने पर पता कराकर कार्रवाई की बात भी कही।