संडवावीर के पास चल रही खुदाई में जुटे लोग
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राजापुर(चित्रकूट)। बुंदेलखंड मेें इन दिनों सूखा है। खेती और पशुपालन संकट में है, लेकिन नव पाषाण काल में यहां भरपूर पानी था। खेती और पशुपालन की शुरुआत भी इसी काल में हो गई थी। इसका सबूत मिला है संडवावीर में चल रही खुदाई में। इतिहासकारों का दावा है कि खुदाई में मिली अवशेष से पता चलता है कि बुंदेलखंड में प्राचीन सभ्यता रही है। यहां नव पाषाण काल में ही खेती व पशुपालन शुरू हो गया था।
मालूम हो कि राजापुर तहसील क्षेत्र के कलवलिया गांव के पास स्थित संडावीर टीले के पास खुदाई चल रही है। टीले के आसपास नव पाषण काल की सभ्यता के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। भरपूर पानी होने की वजह से यहां स्थायी निवासी थे। यहां इसी काल में खेती, पशुपालन भी शुरू हो गया। राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अवनीश चंद्र मिश्र, असिस्टेंट प्रोफे सर डॉ. बृजेश चंद्र रावत ने बताया कि अलग- अलग स्थानों पर हुई खुदाई में उत्खनन से नव पाषाण ((7000 - 10000 ईसा पूर्व) एवं ताम्र पाषाण काल (5000- 7000 ईसा पूर्व) और इसके दोनों काल के बाद ऐतिहासिक काल की सभ्यता के बारे में जानकारी मिली है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी सामान मिले हैं, जो गुप्त काल के हैं। लेकिन संडवावीर में नवपाषाण काल के पुख्ता सबूत मिले हैं। मालूम हो कि यह खुदाई विश्विवद्यालय के प्रोफेसर के साथ ही पुरातत्व विभाग के डॉ. रामनरेश पाल राजापुर क्षेत्र के कलवलिया एवं डुडौली गांव के मध्य स्थित टीले पर 19 सितंबर से देखरेख में खुदाई हो रही है।
पाषाण काल से लेकर गुप्त कुषाण काल तक के अवशेष
राजापुर। इतिहासकारों की मानें तो संडवावीर स्थल के उत्तर पश्चिम से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर पाषाण काल के उपकरण सतह से प्राप्त हुए हैं, जिसके दक्षिण लगभग एक किलोमीटर दूरी पर वाल्मीकि नदी के बाएं तट पर गुप्त कुषाण एवं मध्य काल के भी संकेत मिल रहे हैं। इससे यह दर्शाता है कि यह क्षेत्र पाषाण काल से लेकर निरंतर मानव सभ्यताओं का विकास होता रहा है। टीम प्रभारी डॉ.अवनीश चंद्र मिश्र ने कहा कि अभी आगे भी खुदाई में कई महत्वपूर्ण तथ्य मिलने की संभावना है, जिसमें पहाड़ी के पास अशोह गांव के आस पास का निरीक्षण किया जाएगा।