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Chitrakoot News: कोषागार घोटाले में सगे भाई बिचौलिए गिरफ्तार

Sat, 04 Apr 2026 11:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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फोटो 04सीकेटीपी 31 पुलिस की गिरफ्त में दो सगे भाई बिचौलिए। संवाद
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चित्रकूट। कोषागार के 43.13 करोड़ घोटाले के दो सगे भाई बिचौलिए को एसआईटी ने शनिवार को गिरफ्तार किया है। इनके पिता घोटाले के आरोप में जेल जा चुके हैं। वहीं कोषागार घोटाले के एक बिचौलिया की तीसरी बार जमानत अर्जी खारिज हुई है।
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कोषागार घोटाला की जांच एजेंसी एसआईटी को मऊ थाना क्षेत्र के खंडेहा निवासी बिचौलिया हिमांशु सिंह के खाते में आरटीजीएस और चेक से अपने खाते में 18.56 लाख रुपये व प्रियांशु सिंह ने करीब 20 लाख रुपये से अधिक का लेन-देन की डिटेल मिली है। दोनों पर पेंशनर जवाहरलाल, सुशीला देवी और जगत नारायण के खातों से धनराशि गबन करने का आरोप है। दोनों सगे भाई हैं।



इनके पिता ओमप्रकाश सिंह कई महीनों से जेल में हैं। ओमप्रकाश ने अपनी बहन पेंशनर कमला देवी व अन्य पेंशनरों के खाते से धनराशि निकलवा कर हड़पी है। एसआईटी के अनुसार बिचौलिए कोषागार कर्मियों की मिलीभगत से धनराशि का बंदर-बांट करते थे। जांच में सामने आए अभी कई बिचौलिए फरार हैं। इनको पकड़ने के लिए टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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एसआईटी प्रभारी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि बिचौलिया ओमप्रकाश ने अपने दोनों बेटों के खाते में भी धनराशि का लेन-देन किया था। ओमप्रकाश पहले से जेल हैं। उसके दो बेटे पकड़े गए हैं। अभी तक 44 पेंशनर, कोषागार कर्मी व बिचौलिए गिरफ्तार हो चुके हैं।



बिचौलिया दीपक पांडेय की जमानत अर्जी खारिज



शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्याम सुंदर मिश्रा ने बताया कि बिचौलिया दीपक पांडेय ने मृतक पेंशनर सहोदरा देवी के खाते में अपनी खाता अपडेट करा कर 12 बार में 48.97 लाख रुपये निकाले थे। इसी तरह अपनी पेंशनर मां लक्ष्मी देवी के खाते से 38 बार में 1.21 करोड़ रुपये निकाल कर कमीशन का खेल किया था। बिचौलिया की 15 नवंबर 2025 व 17 जनवरी 2026 को पहले भी जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। शनिवार को सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश ने फिर जमानत अर्जी निरस्त कर दी।



क्या है पूरा मामला



कोषागार में अक्टूबर माह में 43.13 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ था। इस मामले में वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने 93 पेंशनरों और चार कर्मचारियों के खिलाफ सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है, जबकि दो कर्मचारी विकास सिंह सचान और अशोक वर्मा को एसआईटी गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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