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एक व्यक्ति की संपत्ति बन गईं हैं पंचायतें

Thu, 01 Jan 2015 11:14 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
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गायत्री शक्तिपीठ में हुई गोष्ठी में पंचायती राज व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता नेहरू युवा केंद्र के पूर्व निदेशक चंद्रशेखर प्राण ने कहा कि तीसरी सरकार के रूप में 73वां संविधान संशोधन कर पंचायती राज की व्यवस्था की गई थी। दुर्भाग्य की बात है कि पंचायतें केवल एक व्यक्ति सरपंच या प्रधान की व्यक्तिगत संपत्ति बनकर रह गईं।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्र के सशक्त और समर्थ बनाने की दिशा में महात्मा गांधी के चिंतन और राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के निर्देश पर संविधान में इसे नीति निर्देशक तत्व के रूप में शामिल किया गया था। बाद में इसने पंचायती राज का रूप ले लिया।

उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि आज पंच या पार्षद को यही नहीं पता होता कि उसका अधिकार क्या है, वह केवल चयनित होकर हस्ताक्षर का कार्य करता है। ग्रामसभा की बैठक महज खानापूरी होती है। सारे निर्णय सरपंच या प्रधान द्वारा लिए जाते हैं। इसके लिए जनजागरण आवश्यक है।
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गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डा. रामनारायण त्रिपाठी का कहना था कि सरकार के विकास की अधिकांश योजनाएं पंचायतों के माध्यम से चलाना संवैधानिक बाध्यता है, पर पंचायतों की वर्तमान दशा देखकर दुख होता है। जब तक गांव की जनता एवं पंचों को अपना अधिकार और कर्तव्य पता नहीं होगा, साथ ही संकल्प, शक्ति, संघर्ष नहीं होगा, विकास नहीं होगा।

वरिष्ठ समाजसेवी कुं. भालेंदु सिंह ने कहा कि हमारा संविधान कई देशों के संविधान का संग्रह है। उन देशों की परिस्थितियां एवं संस्कृतियों के अनुकूल उनके कानून थे। हमारे देश का कानून भी हमारी संस्कृति एवं परिस्थिति के अनुकूल होना चाहिए। ऐसे कानून बनने चाहिए, जिसमें नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता मिल सके।

अरविंद सिंह ने शिक्षा द्वारा युवाओं को नेतृत्व प्राप्त करने की क्षमता का विकास करने की सलाह दी। सेवाग्राम वर्धा के डा. उदयराज ने गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने की जरूरत बताई। इस मौके पर पंकज अग्रवाल, आर ए अग्रवाल, केके त्रिपाठी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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