चित्रकूट। हत्या के मामले में दोष सिद्ध होने पर एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सात- सात हजार रुपए अर्थदंड से भी दंडित किया है। मामला दस साल पहले का है।
सोमवार को अभियोजन अधिकारी जगत पाल यादव ने बताया कि वर्ष 2010 में बरगढ़ थाने में हरदी कला गांव के निवासी राजेंद्र कोल, मनीष व नत्थू के विरुद्ध हत्या और साक्ष्य मिटाने का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था।
इस संबंध में बरगढ़ थानाध्यक्ष योगेश तिवारी ने बताया कि हरदीकला गांव निवासी मंगाली की तहरीर के आधार पर 13 मार्च 2010 को गांव के तीनों आरोपियों ने उसके पुत्र शिवनायक उर्फ छोटू (30) को घेरकर लाठी डंडों से पीटकर मार डाला है।
इसके बाद उसका शव रेल पटरी पर रख दिया था। इसी तहरीर के आधार पर 22 मार्च 2010 को हत्या व साक्ष्य मिटाने की धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को एससी-एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश दीप नारायण तिवारी ने निर्णय सुनाया जिसमें दोष सिद्ध होने पर राजेन्द्र, मनीष और नत्थू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। निर्णय के बाद आरोपियों को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार भेज दिया गया।