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Chitrakoot News: पन्ना टाइगर रिजर्व में और एक बाघ की मौत

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फोटो - 14 नर बाघ। फाइल फोटो
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करतल (बांदा)। बुंदेलखंड के पन्ना टाइगर रिजर्व में लगातार हो रही बाघों की मौत की घटनाओं ने वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल ही में ग्राम तारा से रेस्क्यू किए गए दो वर्षीय नर बाघ की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से एक बार फिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना एक माह के भीतर बाघ की दूसरी मौत है।
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ग्राम तारा में बाघ के प्रवेश और मवेशियों के शिकार के कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश था, इसके चलते वन अधिकारियों को बंधक बनाने की कोशिश भी की गई थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया। वन्यजीव चिकित्सकों ने गहन जांच के बाद उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित किया गया था और उसी दिन शाम को पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में छोड़ दिया गया था।
दावा किया जा रहा था कि रेस्क्यू के बाद बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही थी। ऐसे में, एक सप्ताह के भीतर ही उसकी मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या निगरानी में कोई चूक हुई या बाघ की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया था। ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद ही मिल पाएंगे।
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यह पन्ना टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर बाघ की मौत की दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले, गंगऊ अभ्यारण्य क्षेत्र में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मुख्य मार्ग से कुछ दूरी पर मिला था, जिसकी जांच एसटीएफ जबलपुर द्वारा की जा रही है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेंद्र श्रीवास्तव ने बाघ की मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया कि रेस्क्यू के बाद बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था और उसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी। बाघ की मृत्यु वन परिक्षेत्र अमानगंज बफर के अंतर्गत हुई है और उसका शव सुरक्षित है। उन्होंने किसी भी संदिग्ध गतिविधि से इनकार करते हुए कहा कि विस्तृत जानकारी मौके पर पहुंचकर घटना स्थल और शव का मुआयना करने के बाद ही दी जा सकेगी।

फोटो - 14 नर बाघ। फाइल फोटो

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