जानकीकुंड चिकित्सालय के प्राकृतिक चिकित्सा विभाग में चले तीन दिवसीय शिविर में 800 से अधिक मरीजों ने चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार का लाभ उठाया।
मुख्य अतिथि डा. प्रकाश टुरखिया ने बताया कि एक्यूप्रेशर एवं एक्यूपंचर चिकित्सा पद्धति का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
जानकीकुंड चिकित्सालय के अधीक्षक डा. एबीएस राजपूत ने बताया कि आठ से दस जनवरी तक लगे शिविर में जोड़ों, कंधे, कमर और गर्दन का दर्द, दमा, ब्लड प्रेशर और स्त्री रोग आदि बीमारियों का उपचार किया गया।
इस मौके पर गोष्ठी का आयोजन भी कांफ्रेंस हॉल में किया गया। शिविर में डा. एनएम शाह की टीम ने प्रकाश टुरखिया एवं बीना शाह के नेतृत्व में सेवाएं दीं। नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डा. बीके जैन ने सभी थेरेपिस्ट को शॉल एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया।
प्रकाश टुरखिया ने भगवान श्रीराम की भूमि में काम करने का अवसर देने पर डा. जैन को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि एक्यूप्रेशर एवं एक्यूपंचर चिकित्सा चिकित्सा पद्धति में बिना दवा और ऑपरेशन के उपचार किया जाता है। कम समय में मरीज को ज्यादा फायदा होता है।
जानकी कुंड चिकित्सालय में थेरीपिस्ट सौरभ शर्मा और धर्मेंद्र शर्मा को इसके लिए प्रशिक्षित किया गया है। कहा कि जहां भी परामर्श की जरूरत होगी हम पूरी मदद करेंगे। थेरेपिस्ट बीना शाह ने सेवा भाव पर जोर दिया।