चित्रकूट/खोही। राष्ट्रीय रामायण मेले में शनिवार को भक्तिपरक प्रवचन, श्रीराम व श्रीकष्ण कथा पर आधारित शास्त्रीय नृत्य, संगीत, रामलीला और रासलीला का मंचन हुआ। मेले में उत्तर से दक्षिण तथा पूरब से पश्चिम के विद्वानों, संतों, उत्कृष्ट कलाकारों का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला।
रामकथा के व्याख्यान सभा में श्रीलाल पचौरी ने कहा कि ज्ञानी लोग हमेशा भक्त को प्रेरणा देते हैं। मानस किंकर राम प्रताप शुक्ल ने कहा कि चित्रकूट की महिमा अद्वितीय है। चित्रकूट जैसा तीर्थ स्थल विश्व में कहीं नहीं है। सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक जीव के अंदर श्रद्धा विश्वास नहीं जाग्रत होता, तब तक मर्म नहीं जाना जा सकता है।
सभा का संचालन डॉ. सीताराम विश्वबंधु प्रयाग ने किया। इसके पूर्व राष्ट्रीय रामायण मेले के अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया, पूर्व चेयरमैन नीलम करवरिया, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, महामंत्री करुणाशंकर द्विवेदी, लालू दुबे, प्रिंस करवरिया, देवीदयाल यादव आदि ने मानस मर्मज्ञों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
द्वितीय सत्र में विद्वत गोष्ठी में मानस मर्मज्ञ वंदना तिवारी ने राम और रामायण के संबंध में शोध पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि सांसारिक अभिमान पतन का मार्ग प्रशस्त करता है। तिरुपति के प्रो. आरएस त्रिपाठी ने कहा कि यह मंच समाज को समत्व की ओर ले जाने के लिए वचनबद्ध है।
प्रो. सभापति मिश्र ने कहा कि संपूर्ण रामकथा राग, अनुराग, विराग और रामराग की अमर गाथा है। उन्होने बताया कि अयोध्या से मिथिलापुरी की यात्रा, पुष्प वाटिया में सीताराम का मिलन, धनुष भंग, सीता विवाह की कथा, भगवान श्रीराम की राग यात्रा है।
खड़वा के रमेश चंद्र तिवारी, अयोध्या के डॉ. कृष्णमणि चतुर्वेदी, सुल्तानपुर के सुशील कुमार पांडेय, रामदेव शर्मा मुजफ्फर नगर, डॉ. हरिप्रसाद दुबे अयोध्या, प्रो. मिथिला प्रसाद त्रिपाठी इंदौर, कालका प्रसाद सेमवाल रुद्रप्रयाग, डॉ. आद्या सिंह सुल्तानपुर ने भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। गोष्ठी का संचालन डॉ चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने किया।
ध्वनि एवं प्रकाश के माध्यम से संस्कृति कला संगम नई दिल्ली के यश चौहान की टीम ने संपूर्ण रामायण का दर्शन कराया। दर्शकों ने तालियों की गड़गडाहट से कलाकारों का मनोबल बढ़ाया। वहीं नटवरी कार्यक्रम को अमेठी सुल्तानपुर के त्रिपुरारी महाराज की टीम द्वारा प्रस्तुत किया गया। देर रात तक देवकी नंदन शर्मा, वृंदावन रासलीला संस्थान द्वारा रासलीला का मंचन किया गया। संचालन डॉ. करुणा शंकर द्विवेदी ने किया।
कार्यक्रम को संपन्न कराने में जितेंद्र कुमार गोस्वामी, राजाबाबू पांडेय, विनोद मिश्रा बांदा, राजेंद्र मोहन त्रिपाठी, शैलेंद्र करवरिया, कलीमुद्दीन बेग, युसुफ खान, डॉ. घनश्याम अवस्थी, मनोज मोहन गर्ग, सतेंद्र पांडेय, ज्ञान चंद्र गुप्ता, प्रिंस करवरिया, रामप्रकाश श्रीवास्तव, गोकुल पांडेय, इम्तियाज खान, सोनू मिश्रा, नत्थू प्रसाद सोनकर, विकास रैकवार आदि कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।
-