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Chitrakoot News: दस लाख का बिल 50,000 तो तीन लाख का डेढ़ हजार में निपटाया

Tue, 05 Aug 2025 12:49 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
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चित्रकूट। बिजली विभाग में अक्सर मनमाने बिल आने पर उपभोक्ताओं को परेशान होते देखा जा सकता है लेकिन बीच एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। अगर विभाग में जुगाड़ हो तो लाखों का बिल भी दो चार हजार रुपये में भी निपट सकता है।
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विभागीय अधिकारियों पर 10 लाख से अधिक का बिल 50,000 और तीन लाख से अधिक का बिल डेढ़ हजार में निपटाने के आरोप लगा है। इसकी शिकायत एमडी कार्यालय तक की गई है। यहां तक कि विभागीय लिपिक ने भी इस पर शक जाहिर करते हुए विभागीय अधिकारियों से सोशल ऑडिट कराने के लिए पत्र लिखा है।
बरवारा गांव के सुनील कुमार ने बिजली विभाग के एमडी पंकज कुमार समेत अन्य उच्चाधिकारियों को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि राजापुर अधिशासी अभियंता कार्यालय से लाखों के बिल को जुगाड़ से हजारों में कर उपभोक्ता से मोटी रकम ली जा रही है। साथ ही राजस्व का क्षति भी पहुंचाई जा रही है। उन्होंने तीन नाम बिल व कनेक्शन नंबर के साथ आरोप लगाया कि काॅमार्शियल के तीन अगस्त 2024 के एक तीन लाख से अधिक के बिल को इसी महीने में मात्र 1437 रुपये जमा कराकर फाइनल किया गया।
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इसी प्रकार 26 मई 2025 के दो लाख 59 हजार से अधिक के बिल को जुलाई माह में मात्र 12,558 रुपये में फाइनल किया गया। इसी प्रकार जुलाई 2024 के 10 लाख से अधिक के बिल को 50,000 जमा कराकर फाइनल किया गया है। आरोप लगाया कि अधिशासी अभियंता भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
इस मामले में राजापुर अधिशासी अभियंता शिवकुमार ने बताया कि हां आरोप तो लगे हैं, उनसे पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। प्रभारी एसई (सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर) मनोज कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। इसकी जांच कराने के पूर्व सारे कागजात एकत्र किये जा रहे हैं।

इनसेट
बिल संशोधन के जांच की मांग
चित्रकूट। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि बिजली विभाग राजापुर में तैनात एक लिपिक ने भी जांच कराने की मांग की है। अधिशासी अभियंता को लिखे पत्र में लिपिक ने बताया कि बिल संशोधन में विभागीय नियमों की अनदेखी हो रही है। इससे राजस्व का क्षति की संभावना है। बिल संंशोधन की जांच कराने के लिए अधिकारी जांच कराएं जिससे क्षति पहुंचाने वाले अधिकारी व कर्मचारी पर लगाम लगाई जा सके।
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