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यमुना के पानी से उफनाए नाले में दो मासूम डूबे

Sat, 24 Aug 2013 05:34 AM IST
Chitrakoot
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चित्रकूट। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मऊ में नदी का पानी एक नाले में पहुंचने और नाले के उफनाने से रपटे में खेल रहे दो बच्चे फिसलकर नीचे जा गिरे और डूब गए। बाद में इनके शव ही पानी से बाहर आ सके। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट गया है। राजापुर में भी यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से कई मार्गों में सड़क से आवागमन बाधित है और लोग नावों के सहारे आ जा रहे हैं।
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यमुना नदी में बाढ़ जारी है। जलस्तर बढ़ने से नदी का पानी आसपास के चेकडैमों और नालों में भी जा रहा है। मऊ प्रतिनिधि के अनुसार, शुक्रवार को मऊ थाना क्षेत्र के मैदाना गांव में दो बच्चों की नाले में डूबकर मौत हो गई। इस संबंध में बताया जाता है कि नन्हू (9) पुत्र नानबाबू और विष्णु (8) पुत्र रहीस घर की महिलाओं के साथ मैदाना नाले में नहाने गए थे। महिलाएं तो लौट आईं पर दोनों बच्चे वहीं गांव के अन्य हम उम्र बच्चों के साथ वहीं रपटे में खेलने लगे। अचानक तेज बहाव आने से दोनों उफनाए नाले में गिर गए। साथ के बच्चों ने घर आकर बताया तो कोहराम मच गया। दोनों बच्चों के घरवाले दौड़कर वहां पहुंचे तो दोनों के शरीर पानी में उतरा रहे थे। इनको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मऊ में शिवपुर के पास नदी, गरेवा नाला, गुड़िहा नाला, टिकरा नदी का बरियारा नाला, कोटरा, चमोहरा, घुरेहटा, बुंदेला नाला उफनाने से आवागमन ठप हो गया है। इनका संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया है। मऊ से परदवां, मऊ से मंडौर, मवई, बरवार आदि जगहों पर आवागमन नाव से हो रहा है। इनके अलावा टिकरा, परदवां में पानी घुस रहा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति मवई गांव की है। उधर, परदवां गांव के राधाकृष्ण द्विवेदी ने बताया कि गांव में पानी ने फसलों को चौपट करके रख दिया है। बाजरा, रेड़ी, अरहर, मूंग, तिल आदि की सैकड़ों बीघे की फसल बर्बाद है। वीरेंद्र सिंह, धीरज सिंह आदि ने बताया कि गांव का प्राचीन मणि माता का मंदिर भी चारों तरफ से पानी से घिरा है। गांवों में पानी भरे होने से आवागमन नावों से हो रहा है और नाव वाले 10 से 30 रुपये तक मनमाना वसूल कर रहे हैं। एसडीएम एके श्रीवास्तव ने बताया कि पांच नावें लगाई गई हैं और लेखपालों के साथ मीटिंग कर उनको गांवों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। राजापुर प्रतिनिधि के अनुसार, वहां पर तिरहार क्षेत्र के अर्की गांव के बाद अब राजापुर-कमासिन-सरधुवा मार्ग भी बाढ़ के पानी की चपेट में है। हर्ष नारायण त्रिपाठी ने बताया कि बारिश से कसबे की हालत भी बदतर हो गई है। गांवों को आने जाने वाले रास्तों में नदी का पानी भरने से वहां भी आवागमन प्रभावित है।

इनसेट -------------------
मंदाकिनी का जलस्तर कम, राहत की सांस
उधर, चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर कम होने से आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली। रामघाट में भी जलस्तर में काफी गिरावट आई है। इससे वहां घाट किनारे दुकान किए लोगों को बाढ़ के कम होने की आशा बंधी है। गौरतलब है कि बाढ़ आने से सबसे ज्यादा प्रभावित ये ही लोग होते हैं।
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इनसेट -------------------
बरुआसागर डैम में पानी बढ़ा, ग्रामीण सशंकित
चित्रकूट। बारिश के चलते शिवरामपुर के पास बरुआसागर डैम में भी जल स्तर काफी बढ़ गया है। बांध का जलस्तर देखकर ग्रामीण भी सशंकित हैं। गुरुवार को देर शाम सिंचाई विभाग ने टिटिहरा, मऊ, भरथौल, गोबरिया, चौकन्ना आदि गांवों मेें ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नहर के फाटक जाम हो चुके है वे कभी खुलते ही नहीं, जबकि अवर अभियंता पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि बांध का फाटक खुल जाता है। अभी बांध अपनी क्षमता से काफी कम है। अवर अभियंता के आश्वासन के बाद भी प्रशासन के द्वारा डिग्गी पीटकर आगाह करने के बाद ग्रामीणों के आशंकाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रैपुरा गांव के बुजुर्ग उमाशंकर पंाडे ने बताया कि रानी तालाब तेजी से ऊफना गया है, जिसके चलते गांव के शिवशंकर, बाबूलाल, चंद्रभान, बृजेंद्र कुमार, कल्लू प्रसाद, भरतराम, रामरुद्र, शंभूदयाल और राजेश कुमार की लगभग 42 बीघे खेती तालाब के पानी मे डूब गई है। उन्होंने बताया कि तालाब में जल निकासी के मार्ग पर लोगों ने घर बना लिए है जिससे तालाब का पानी काफी दूर तक फसलों को अपने जद में ले चुका है। ग्रामीण ने आगामी तहसील दिवस पर जिलाधिकारी से तालाब की पानी की निकास की व्यवस्था करने की गुहार लगाने का मन बनाया है। उनका कहना है कि गांव के वहीं बरुआ सागर डैम भी अपने पूरे उफान पर है।
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