ग्राम पंचायत मकरी के मजरे मकरी पालदेव में मंगलवार रात लगी आग से आठ घर तबाह हो गए। जब तक फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचती आठों गृहस्थियां राख हो गईं। जली हुई दीवारें और अनाज हादसे की भयावहता बयां कर रहे थे। भुक्तभोगियों के शरीर पर सिर्फ कपड़े ही बचे थे। न खाने को था, न पहनने को। राजस्व कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। पीड़ितों को तात्कालिक सहायता के रूप में कोटेदार से अनाज मुहैया कराया।
शिवरामपुर-भैसोंधा मार्ग से लगभग बीस किमी दूरी पर ग्राम पंचायत मकरी के मजरे मकरी पालदेव में मंगलवार रात लगी आग ने निषाद जाति के आठ लोगों के घरों को चपेट में ले लिया। शंकर ने बताया कि वह सो रहा था तभी अचानक रात लगभग डेढ़ बजे बेचैनी होने पर उसकी नींद खुली। घर में आग लगी देख वह सन्न रह गया। उसने पत्नी कैलसिया और अन्य लोगों को जगाया। किसी तरह बाहर भागकर उसने जान बचाई।
धीरे-धीरे आग ने विकराल रूप ले लिया। उसके भाई और रिश्तेदारों के घर भी जलने लगे। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन जब तक दो दमकल पहुंचीं, सब राख हो चुका था। लेखपाल शिवप्रताप शुक्ला और राजस्व निरीक्षक दृगपाल ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। बताया कि ग्रामीणों को फिलहाल बीस किलो गेहूं और दस किलो चावल देने की व्यवस्था की जा रही है। उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी।
पीड़ितों को ढांढस बंधाने वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय और बसपा नेता जगदीश प्रसाद गौतम भी पहुंचे। गौतम ने पीड़ित परिवारों को पचीस हजार रुपये की मदद दी। चंद्रिका प्रसाद ने आश्वासन दिया कि वह प्रशासन से मिलकर इनके लिए आवास की व्यवस्था कराएंगे।
कहीं विवाद तो कारण नहीं!
पत्नी मैकी के साथ जले अनाज के पास बैठे हीरालाल ने गांव के ही कुछ लोगों पर आग लगाने का आरोप लगाया। उसने कहा कि उसके परिवार की गांव के ही कुछ लोगों से रंजिश है। रात में वह बारी (सब्जी लगाने वाले स्थान) में था तभी लोगों ने उसे आग लगने की सूचना दी। जब तक वे लोग यहां आते, सब जल चुका था।
इतना हुआ नुकसान
राजस्व कर्मियों के आकलन के अनुसार, शंकर पुत्र देसवा उर्फ देशराज का लगभग 36 हजार, उसके भाई रामकुमार का 66 हजार, शिवकुमार का 65 हजार, हीरालाल पुत्र केशन का 60 हजार, उसके भाई रामनरेश का 60 हजार, राममिलन पुत्र रामप्रताप का एक लाख बीस हजार, देशराज पुत्र धानू का लगभग 95 हजार का नुकसान हुआ है।
खाने के लाले
शंकर की पत्नी कैलसिया, हीरालाल की पत्नी मैकी आदि ने बताया कि पूरे साल के लिए किसी तरह अनाज बचा कर रखा था। अब तो लगता है कि खाने के लाले पड़ेंगे।
पुत्रियों की शादी की चिंता
पीड़ितों को अब पुत्रियों की शादी की चिंता सता रही है। रामनरेश ने बताया कि उसको पुत्री उमा की शादी अगले साल करनी थी। मेहनत मजदूरी करके उसने गहने और कपड़े जोड़े थे। आग में सब तबाह हो गया। शंकर निषाद की भी यही पीड़ा रही।