बालू गिट्टी के अभाव में विकास कार्य ठप
:- ग्राम पंचायताें में विकास कार्य ठप
:- ठेकेदारों व प्रधानों ने किए हाथ खडे़
:- ई-टेंडरिंग के बाद दोगुने दाम में बिक रही बालू
:- सूबे में सत्ता बदलने का नहीं दिख रहा प्रभाव
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। बालू व गिट्टी न मिलने से विकास कार्यों में खासा असर पड़ रहा है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पडे़ हैं। शहर सहित कस्बों में पक्के मकानों का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ शौचालय पर भी इसका असर पड़ा है। ठेकेदारों के अलावा आमजन मानस मजबूरी में दुगने दाम में बिक रही बालू खरीदने को मजबूर है।
गौरतलब है कि खनिज संपदा व बालू के खनन के कार्य में शासन की सख्ती होने के कारण कई स्थानों पर खनन कार्य बंद हो गया है। जिससे बालू व गिट्टी का अभाव होने से विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं।परेशान प्रधानों ने भी अधिकारियों के सामने हाथ खडे़ कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस समय बालू व गिट्टी नहीं मिल रही है। जिससे वह समय और पुराने रेट में विकास कार्य नहीं करा सकते हैं।
प्रधान संघ के जिला विमल कुमार ने बताया कि दुगने दाम में बालू मिल रही बालू के कारण ग्राम पंचायतों में हो रहे विकास कार्य ठप पडे़ हैं। ठेकेदार विनय त्रिपाठी ने बताया कि पिछले साल एक ट्रैक्टर ट्राली बालू के दाम 3500 रुपये थे। अब सात हजार में वहीं बालू मिल रही हैं। जिससे ठेकेदार परेशान हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एन के सिंह ने बताया कि बालू व गिट्टी का अभाव होने से विकास कार्य कराने में परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।
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मजदूर परेशान
चित्रकूट। मजदूर रामनारायण, भोड़ी, कुसमा, लक्ष्मण, सुनीता प्रजापति, रोहित रैकवार ने बताया कि एक साल से लोग पक्के मकान बनवाना बंद कर दिया है। जिससे उन्हें काम नहीं मिलता है।
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बालू के दाम हुए दुगने
चित्रकूट। सप्लायर रामबाबू गुप्ता ने बताया कि पिछले वर्ष बालू के दाम में लगभग दोगुनी बढोत्तरी हुई है। गिट्टी के दाम पिछले साल चार हजार थे अब पांच हजार तक में मिल रही है।