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2550 हैंडपंप खराब, पेयजल संकट गहराया

Sun, 07 Jun 2015 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चित्रकूट
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गर्मी बढ़ने के साथ ही जलस्तर गिरने से जिले में पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर ग्रामीण और ऊंचाई वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा है। जल निगम के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 2550 हैंडपंप खराब पड़े हैं। पिछले एक साल में जिले में ज्यादातर जगहों पर जलस्तर एक से दो मीटर तक नीचे चला गया है।
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कई जगह घंटों हैंडपंप चलाने के बाद थोड़ा पानी आता है, वो भी गंदा। भूमिगत जलस्तर तेजी से गिरने से हैंडपंप और नलकू प सूखते जा रहे हैं। जलनिगम के  अधिशाषी अभियंता जेपी सिंह ने बताया कि जितने हैंडपंप नए लगवाए जा रहे हैं, उनसे ज्यादा तो वाटर लेवल नीचे जाने से रिबोर की स्थिति में हैं।

पाठा में है सर्वाधिक परेशानी
जल निगम से मिले आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 17 हजार हैंडपंप हैं। इनमें से लगभग 15 प्रतिशत हैंडपंप खराब पड़े हैं। तेजी से गिरते जलस्तर का खामियाजा गांवों के लोगों को ज्यादा भुगतना पड़ रहा है, जिनके लिए पानी का एकमात्र सहारा हैंडपंप हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत मानिकपुर के पाठा इलाके में आती है, जहां जल  स्तर काफी नीचे चला गया है। यहां पानी का स्तर 45 से 50 मीटर है, जबकि आम तौर पर जिले का जलस्तर 25 मीटर तक है।  
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कर्वी ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुका
जल दोहन के हिसाब से जिला मुख्यालय के पूरे कर्वी ब्लाक को तो डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। जलनिगम के एक्सएईन जेपी सिंह ने बताया कि जिले के पांचाें ब्लाकों का जलस्तर भिन्न-भिन्न है। मुख्यालय क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर जहां 25 मीटर है, वहीं पहाड़ी में 15, रामनगर में 12 और मऊ में 30 मीटर है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले के सरकारी हैंडपंपों में से 450 रिबोर की स्थिति में हैं। वहीं लगभग 1360 हैंडपंपाें की मरम्मत करवाई जानी है। उन्होंने बताया कि भू जलस्तर गिरने से कई नलकू पों में पानी सूख गया है। पानी के निरंतर दोहन से यह स्थिति पैदा हो रही है।
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