चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में बेड़ी पुलिया से रामघाट तक का छह किलोमीटर लंबा मार्ग फिर चर्चा में है।
इसके विकास के लिए 200 मकानों पर तलवार लटक रही है। लोगों को डर है कि फुटपाथ के लिए सड़क के दोनों तरफ ढाई से तीन मीटर जमीन और ली जाएगी। इससे उनके मकान और दुकानें एक बार फिर जद में आ जाएंगी।
इस मार्ग पर फुटपाथ, बैठने की व्यवस्था और फुलवारी विकसित करने की 10 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी मिली है, लेकिन इस विकास ने सड़क किनारे बसे करीब 200 मकान मालिकों और दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है।
बेड़ी पुलिया से रामघाट तक जाने वाला यह मार्ग चित्रकूट का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। हर अमावस्या, दीपावली और सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से रामघाट और मंदाकिनी तट तक पहुंचते हैं। 2017-18 में इसी मार्ग को चौड़ा करने के लिए दर्जनों मकानों और दुकानों का हिस्सा ध्वस्त किया गया था।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने उस समय मुआवजे का आश्वासन दिया था, लेकिन छह साल बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी। कई परिवारों ने कर्ज लेकर अपने टूटे मकानों की मरम्मत कराई और नए नक्शे पास कराए। अब फिर जमीन लिए जाने की चर्चा से वे दहशत में हैं।
पहले का मुआवजा नहीं मिला
2017 में चौड़ीकरण में मकान का हिस्सा टूटा था। छह साल से मुआवजा नहीं मिला। अब फुटपाथ के लिए फिर जमीन लेने की बात है। - संपत कुमार, रामघाट मार्ग।
बाढ़ से उबरे, अब नई आफत
बाढ़ से कारोबार चौपट था, अब पटरी पर आ रहा है। फुटपाथ के नाम पर फिर उजाड़ने की तैयारी है। विकास के साथ हमारा हित भी देखा जाए।- जगदीश सिंह, दुकानदार।
वर्जन
बेड़ी पुलिया से रामघाट तक विकास कार्य प्रस्तावित है। इसके लिए टीम गठित की जा रही है। पहले मौके पर चिह्नाकन होगा, उसके बाद मानकों के अनुसार नोटिस जारी की जाएगी। - अजय कुमार यादव, एसडीएम सदर