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आधा दर्जन ग्रामीणों पर कर चुका जानलेवा हमला

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जंगल से लकड़ी नहीं लाए तो कैसे जलेंगे चूल्हे
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। कोल आदिवासियों के लिए कभी डकैत तो कभी जंगली जानवर जान के दुश्मन बन जाते हैं। जंगल के सहारे रोजीरोटी चलाने वाले इन परिवारों के सदस्यों को अब जंगल में घुसने पर भी डर लगता है। मारकुंडी थानाक्षेत्र के जोरामाफी व आसपास के ग्रामीणों में इतनी दहशत है कि ग्रामीण जंगल की ओर नहीं जाते। जिससे कई दर्जन घर के चूल्हे नहीं जले। ग्रामीणों ने वन विभाग व रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र के अधिकारियों के प्रति भी गुस्सा जाहिर किया। महिला को जान से मारने वाला वनरोज एक दो नहीं आधा दर्जन ऐसी घटनाओं को अंजाम दे चुका है लेकिन इसे पकड़कर रखने का काम नहीं किया जा रहा है।
मारकुंडी थानाक्षेत्र के जारोमाफी व आस पास पुरवावासियों ने बताया कि यह वनरोज पहले मारकुंडी के पास स्थित मंदिर के पुजारी ने इसे पाला था। इसके बड़ा होने पर हिंसक हो गया तो इसे रानीपुर वन्य जीव विहार व वन विभाग के अधिकारियों को दे दिया गया था। अब इसे वन क्षेत्र में खुला छोड़ दिया गया है। जो आएदिन ग्रामीणों पर हमला करता है। ग्रामीणों के अनुसार छेरिहा निवासी खगेश यादव के दो पुत्रों पर इसी वनरोज ने हमला कर घायल कर दिया था। घटना गांव के पास होने के कारण ग्रामीण लाठी लेकर पहुंच गए थे जिससे दोनों भाई की जान बच गई थी। जारोमाफी के रघुराई के पुत्र पर जानलेवा हमला किया था। देशराज की पत्नी को भी निशाना बनाकर घायल कर दिया था।
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इस क्षेत्र में नर वनरोज की लगातार बढ़ती घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी कर परिवार चलाने वाले लोग जंगल से लकड़ी लाकर ही चूल्हा जलाते हैं। कुछ लोग तो इसी लकड़ी को बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं। ऐसे में इस हिंसक वनरोज को न हटाया गया तो इसी तरह दर्दनाक घटनाएं होती रहेंगी। ग्रामीणों ने कहा वन विभाग के अधिकारी कुछ नहीं करेंगे तो आक्रोश में इसे मार दिया जाएगा। कुछ माह तक पालतू होने के कारण यह गांव के आस पास ही मौजूद रहता है।
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