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बदमाशों के डर से सड़क किनारे लगी क्रशर मशीनें

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बदमाशों के खौफ से सड़क किनारे लगी क्रेशर मशीनें
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। भरतकूप क्षेत्र में लगी क्रेशर मशीनों के मालिकों के लिए एक तरफ कुंआ व दूसरी तरफ खाई की कहावत चरितार्थ हो रही है। जिन्होंने डाकुओं के डर से राष्ट्रीय राजमार्ग के कि नारे क्रेशर मशीनें लगा लिया था। ताकि डाकुओं को कमीशन न देना पड़े। दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व खनिज विभाग प्रदूषण फैलाने पर क्रेशर मशीनें बंद करने के लिए नोटिस थमा दिया है। इससे क्रेशर उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। दो साल पहले कोर्ट के आदेश पर सैकड़ों क्रेशर बंद हो गये थे। जिससे क्षेत्र के हजारों मजदूर बेरोजगार हो गये थे। विकास कार्र्यों पर भी खासा असर पड़ने लगा था।
क्षेत्र में सैकड़ों क्रेशर मशीनें लगी है। कई बार क्रेशर मालिकों के परिवार के सदस्यों व कर्मचारियों को डाकुओं ने अपहरण कर रुपये वसूले। पिछले साल जंगल में लगी एक क्रेशर मशीन के तीन कर्मचारियों का अपहरण कर लिया था। जिनके लाइसेंसी असलहे भी छीन लिए थे। इसके अलावा जैन परिवार के क्रेशर मालिक सगे दो भाईयों का डाकु ओं ने अपहरण कर लिया था। जिनसे लाखों रुपये वसूले थे। इसी तरह से कई अन्य घटनाएं क्रेशर मालिकों के साथ हो चुकी हैं। जिससे जंगल में लगी क्रेशर मशीनें सुरक्षा के मद्दे नजर भरतकूप क्षेत्र मेें राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे क्रेशर मालिकों ने लगा लिया था। अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व खनिज विभाग ने उन्हें क्रेशर मशीनें बंद करने के लिए नोटिस पकड़ा दी हैं। जिससे क्रेशर मालिक परेशान हैं।
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क्रेशर मालिक राजेंद्र सिंह व लाखन सिंह आदि का कहना है बदमाशोें के डर से राष्ट्रीय राजमार्ग के कि नारे मशीनें लगी हुई है। इसके अलावा पुलिस सुरक्षा कभी नहीं मिलती। कभी बिजली विभाग की मनमानी तो कभी प्रदूषण नियंत्रण के बदलते नियमों से अब व्यापार करना कठिन हो रहा है। हर अधिकारी आएदिन परेशानी ही खड़ी करता है।
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भरतकूप चौकी प्रभारी तपेश मिश्रा ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले बदमाशों का आतंक था। कई बार क्रेशर वाले प्लांटों के आसपास भी घटनाएं हुई हैं। पुलिस सूचना मिलते ही हर संभव मदद करती है। पुलिस ने ही बदमाशों का आतंक खत्म कराया है। व्यापारिक नियमों का पालन करना क्रेशर मालिकों का काम है। पुलिस शासन के निर्देश पर ही कार्रवाई करती है।
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