चित्रकूट। वेतन विसंगतियों को लेकर हड़ताल कर रहे लेखपालों को प्रशासन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। जिले के 11 लेखपालों को काम पर न लौटने के कारण निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य पदाधिकारियों को नोटिस जारी हुई है। वहीं धरने पर बैठे लेखपालों का गुस्सा थमने की बजाए बढ़ गया है। लेखपालों ने कहा कि मांगे पूरी होने पर ही कार्य बहिष्कार खत्म होगा।
गुरूवार को मुख्यालय के तहसील परिसर पर लेखपालों के कार्य बहिष्कार के साथ धरना जारी रहा। लेखपालों ने जिला मुख्यालय की तहसील परिसर में धरना दिया। लेखपालों ने कहा कि सरकार लेखपालों की आवाज को जबरन दबाना चाहती है लेकिन आंदोलन जारी रखेंगे। वही हड़ताल को देखते हुए शासन की तरफ से लेखपालों को नोटिस भेजी गई है। जिसमें कहा गया कि नो वर्क नो पे के सिद्धांत का प्रयोग करते हुए गैर कानूनी उपस्थित पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई है।
लेखपालों की हड़ताल 10 दिसम्बर से चल रही है। जिसमें कार्य बहिष्कार भी किया जा रहा है। जिला मुख्यालय में जिलाध्यक्ष जगन्नाथ सिंह के नेतृत्व में धरना दिया जा रहा है। धरने में लेखपालों ने कहा कि सरकार दमनकारी नीति अपनाते हुए लेखपालों की आवाज दबना चाहती है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष जगन्नाथ सिंह, जिला सचिव अजय कुमार दिनकर, लवलेश सिंह, रामचंद्र शुक्ला, रामनिवास शुक्ला, ज्ञानेंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, राजीव कुमार सिंह, संगमलाल आदि मौजूद रहे।
चित्रकूट। अपर जिलाधिकारी जीपी सिंह ने बताया शासन की मंशानुरूप काम न करने पर कार्य बहिष्कार कर रहे 11 लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है। जिसमें सदर तहसील चित्रकूट, मऊ व मानिकपुर के तीन-तीन व राजापुर के दो लेखपाल शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिले के अन्य तहसीलवार लेखपाल संघ के पदाधिकारियों को नोटिस जारी की गई है।