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जिपं अध्यक्ष चुनाव: सपा के बागियों पर टीकी है निगाहें

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चंदौली। जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रत्याशी की घोषणा को लेकर किसी भी दल ने अभी पत्ते नहीं खोले है, लेकिन विभिन्न दलों से बागी होकर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते लोगों को अपने पाले में करने की कवायद तेज हो गई है। चर्चा तो यहां तक पहुंच गई है कि एक धनबली ने जिले के सर्वोच्च पद की लालसा को लेकर एक दल में दावा भी कर दिया है। लेकिन उसकी दल-बदलू नीति के चलते पार्टी के पदाधिकारी अभी पशोपेश में हैं। खैर जो भी हो लेकिन यह जरूर है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में कांटे की टक्कर होना तय है।
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35 सदस्यों वाली जिला पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए किसी भी प्रमुख दल के पास बहुमत नहीं है। लेकिन सपा जिले में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उसके करीब 14 सदस्य निर्वाचित हुए है। वहीं भाजपा के आठ सदस्य जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर आए है। इसलिए सपा और भाजपा में ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर प्रमुख टक्कर मानी जा रही है। जबकि कांग्रेस को जिले की जनता ने एकदम नकार दिया है। बसपा ने कुछ दम दिखा है, लेकिन उसके मुकाबले भीम आर्मी ने एक सीट जीतकर अपनी दमदार उपस्थिती दर्ज कराई है। ऐसा माना जा रहा है कि जिले की सबसे बड़ी कुर्सी को लेकर इस बार निर्दल और बागी काफी निर्णायक साबित होंगे। जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव के दौरान भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक रणनीति के तहत यह मान लिया था कि उनकी झोली में 25 सीट आनी है। भाजपा अपने होमवर्क के बलबूते अधिकांश जिला पंचायत सीट पर जीत दर्ज करने का सपना संजोए हुई थी। पिछले तीन महीने की कवायद के बावजूद भाजपा महज आठ सीटों पर सिमट कर रह गई। रणनीतिकार मानते हैं कि सबकी नजर निर्दलियों पर है, इतना तय है कि निर्दलियों की कृपा जिस पर बरसेगी, अध्यक्ष का सेहरा उसी के सिर सजेगा। वैसे भी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में आजतक एक धनबली और एक बाहुबली पर्दे के पीछे से एक दूसरे को मात देने की कोशिश करते है। अनुमान है कि इसबार भी ऐसा कुछ देखने को मिल सकता है।
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