सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह के छोटे साहबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के श्रद्धांजलि को वीर बाल दिवस के रूप में सोमवार को मनाया गया। इस मौके पर रेलवे की ओर से स्थानीय रेलवे स्टेशन पर चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इसके माध्यम से यात्रियों ने बाल वीरों की बलिदान की कहानी जानी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। जिसके बाद पीडीडीयू जंक्शन पर 38 चित्रों के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों के बलिदान की गाथा प्रदर्शित की गई। ट्रेन पकड़ने जा रहे और ट्रेन से उतर कर वापस लौट रहे यात्री लगातार चित्रों को निहारते और बाल बलिदानियों की गाथा को याद करते।
बच्चों ने जानी सर्वोच्च बलिदान की कहानी
जिले के स्कूलों में भी वीर बाल दिवस मनाया गया। इस मौके पर बच्चों ने गुरु गोविंद सिंह के साहबजादों के सर्वोच्च बलिदानों की कहानी जानी। शिक्षकों ने बच्चों इस कहानी के माध्यम से देश प्रेम की अलख जगाई।
नगर पालिका इंटर कॉलेज में आयोजित वीर बाल दिवस में प्राचार्य डॉ. महेन्द्र कुमार पांडेय ने कहा कि गुरुगोविंद सिंह के बेटों के बलिदान देश के इतिहास में सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। इस अवसर पर अरुण कुमार, डॉ. अशोक त्रिपाठी, फिरोज खान, मृत्युंजय पांडेय, रमेश सिंह, डॉ. दिनेश, डॉ. राजकिशोर यादव, मयंक मोहन , शैलेन्द्र पटेल, आनंद तिवारी, वेदप्रकाश गुप्ता, राजेश यादव मौजूद रहे। संचालन योगेश सिंह ने किया।
छात्रों को सुनाई बलिदान की कहानी
छत्रधारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय दयालपुर, सदलपुरा में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के दौरान वीरबाल दिवस मनाया गया। महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. अरुण कुमार सिंह, उपप्राचार्य प्रमोद कुमार सिंह, डॉ. नंदलाल, अर्चना मिश्र, डॉ. सुनील कुमार, प्रतीस केसरी, अवनीश, गौरव सिंह, धनंजय यादव, डॉ. अय्यर्मा सिंह, निरंजन यादव, बृजेश सिंह, तनु सिंह रहे। इसी तरह गांधी राष्ट्रीय इंटर कॉलेज सदलपुरा में वीर बाल दिवस पर छात्रों को बलिदान की कहानी सुनाई गई। इस मौके पर विनोद प्रजापति, मिथिलेश सिंह, अशोक, अवधेश मिश्रा, धनंजय सिंह, सत्येंद्र चौहान, अनिल यादव रहे।