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जर्जर भवन में पढ़ाएंगे फिर भी विद्यालय पर इतराएंगे

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कंदवा। सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढे़ं सब बढे़ और स्वच्छ स्कूल सुंदर स्कूल का नारा भले ही बुलंद किया जा रहा हो लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति बेहद खराब है। बरहनी विकासखंड के दर्जनों प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की छतें व दीवारें जर्जर हैं। जर्जर भवनों में बच्चे पढ़ रहे है। बावजूद इसके बेसिक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन सिर्फ विद्यालयों के कायाकल्प का दावा कर रहा है।
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बरहनी विकास खंड में 82 प्राथमिक, 27 उच्च प्राथमिक और 27 कंपोजिट विद्यालय संचालित होते हैं। इन सभी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की तादाद भी अच्छी है लेकिन पढ़ने वाले कमरों की स्थिति काफी जर्जर है। विकास खंड के करौती, कुसहा, बहोरा चंदेल, दरौली, तेल्हरा, मुड्डा, भरहुलिया, पोखरा, पई, डिग्घी, कंजेहरा, चखनिया, मुड्डा, तेल्हरा, असना, कोदई गांव के प्राथमिक विद्यालयों के भवनों की छतें व दीवारें जर्जरहैं। कुछ विद्यालयों के कमरों की दीवारें में तो दरारें भी पड़ चुकी हैं। करौती गांव के चंदन पांडेय, अजय पांडेय, कुसहा के प्रमोद सिंह, चखनिया के अशोक सिंह व राणा सिंह, बहोरा चंदेल के कृष्णानंद चौबे, तेल्हरा के विजय शंकर सिंह आदि का कहना है कि गांव के विद्यालयों के जर्जर भवन की स्थिति को लेकर बच्चों व अभिभावकों में भय का माहौल बना रहता है। इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी बरहनी रामआसरे राम का कहना है कि जर्जर विद्यालय भवनों की सूची बना कर मुख्यालय को प्रेषित कर दी गई है।
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