चंद्रप्रभा साहित्यिक संस्था की ओर से संचालित चंद्रप्रभा साहित्यिक मंच की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को आदित्य पुस्तकालय में आयोजित की गई। दूर-दूर से आए श्रोता पूरी रात कवितों के रचना सागर में डुबकी लगाते रहे।
गोष्ठी का शुभारंभ तेजबली अनपढ़ ने सरस्वती वंदना सुनाकर किया। राजेश विश्वकर्मा राजू ने शादी के दिन दुलहा बनके गईली जब ससुरारी... सुनाकर शादी के आयोजन की दुर्व्यवस्थाओं पर व्यंग किया। मिथलेश कुमार ने सगरो मचल महामारी हो-कब अईबा कृष्ण मुरारी हो... सुनाया। राजेश कुमार बेनजीर ने पढ़ा- दूर कर देंगे कहते गरीबी किंतु किसका बताते नहीं हैं। संतोष कुमार धूर्त ने सुन घिर आए बदरा कारे-मेरे प्रियतम बन जारे..., रामप्रवेश सिंह झाऊं ने साथी शायर जिगरी दोस्त मुझे नरेटिव कहते हैं..., बंधु पाल बंधु ने कोरोना की दौड़ में हर लोग हांफते मिले, चक्कर लगाते हॉस्पिटल को ही नापते मिले... सुनाकर तालियां बटोरी। राम अलम सिंह जीवन ने ऊधो सुनि सुनि तोहरे बतिया धधकई हमारी छतिया ना... सुनाया। प्रदीप कुमार पाठक ने जीत बदल दो हार बदल दो-नफरत छोड़ो प्यार बढ़ा दो... कविताएं सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस मौके पर संतोष मौर्या, बेचई सिंह आदि मौजूद रहे। मंच का संचालन हरिवंश सिंह बवाल ने किया।