लगभग डेढ़ माह बीतने को हैं पर जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद की स्थिति निराशाजनक है। सरकारी समर्थन मूल्य कम होने से किसान व्यापारियों को अपना गेहूं बेच रहे हैं हालत यह है कि जिले में 57 क्रय केंद्रों पर बीस हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य तय है। जबकि इसके सापेक्ष मात्र 390 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद ही हो सकी है।
जिले में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से ही शुरू है। जो 15 जून तक चलेगी। इसमें सबसे अधिक पीसीएफ के 32, खाद्य विभाग के नौ, कर्मचारी कल्याण निगम के तीन, यूपीएसएस के दो, यूपी एग्रो के दो, एनपीसीएफ के तीन, भारतीय खाद्य निगम के दो और सहकारी समितियों के चार केंद्रों पर गेहूं खरीद चालू है। लेकिन स्थिति यह है कि सभी क्रय केंद्र किसानों की राह देख रहे हैं। यूपी एग्रो की दो एजेंसियों में अब तक बोहनी भी नहीं हो सकी है, जबकि मंडी समिति में संचालित यूपीएसएस के क्रय केंद्र पर भी एक छटांक गेहूं नहीं खरीदा गया। कारण साफ है गेेहूं का सरकारी समर्थन मूल्य 1525 रुपये कुंतल है, जबकि बाजार में व्यापारी 1650 से 1700 रुपये में सामान्य गेहूं और बीज का गेहूं 1800 रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीद रहा है। ऐसे में किसान अपना माल सीधे व्यापारियों को बेच रहा है। एफसीआई केंद्र प्रभारी पवन प्रकाश और यूपीएसएस के केंद्र प्रभारी शोभनाथ का कहना है कि मार्केट रेट अधिक होने से किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर कम आ रहे हैं।