पीडीडीयू नगर। मिशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को विकास किया जा रहा है। स्कूलों को चमका कर निजी स्कूलों के टक्कर का बनाया जा रहा है। मगर अभी तमाम परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। बच्चे अभी भी टाट पट्टी पर बैठने को मजबूर हैं।
जिले में 1185 परिषदीय विद्यालय हैं। उनमें ढाई लाख से अधिक बच्चों का दाखिला हुआ है। बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाताी है। यूनिफार्म, जूते और स्कूली बैग के लिए अभिभावकों के एकाउंट में पैसे भेजे जा रहे हैं। यूनिफार्म पहनकर जाने वाले बच्चों को जब जमीन पर बैठना पड़ता है तो परेशानी होती है। पूर्व में बेसिक शिक्षा विभाग विभाग स्तर पर स्कूलों की बेहतरी के लिए कार्य कर रहा था अब इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दे दी गई है। विभाग के मुताबिक 300 विद्यालयों के लिए टेबल व बेंच का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। वहीं ग्राम पंचायतों को भी स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था के लिए कहा जा रहा है।
टांडा कला के अशोक प्रारंभिक प्राविधिक विद्यालय में बच्चे टाटा पट्टी पर बैठ रहे हैं। स्कूल भवन भी जर्जर हो चुका है। प्रधानाध्यापक श्याम नारायण राम ने कई बार अधिकारियों पत्र लिखा पर कोई सुनवाई नहीं हुई। विद्यालय का निर्माण समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 1936 में कराया था । बारिश में इसकी छत टपकती है। यह अकेला उदाहरण नहीं है, ऐसी स्थिति से तमाम विद्यालयों की है।
कोट
परिषदीय विद्यालयों में व्यवस्था सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकतर विद्यालयों में टेबल और बेंच की व्यवस्था कर दी गई है। शेष स्कूलों में फर्नीचर की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी।
सत्येन्द्र कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी