चकिया । मानसून के बावजूद बारिश नहीं होने से कर्मनाशा सिस्टम के बांधों का जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। मूसाखांड बांध के जलस्तर में चार फीट तो नौगढ बांध का जलस्तर पांच फीट तक गिर चुका है। कर्मनाशा सिस्टम की नहरों के संचालन से भी जलस्तर पर प्रभाव पड़ रहा है। इसके बावजूद बांधों में अभी एक महीने तक पानी देने की क्षमता बनी हुई है।
जून-जुलाई माह में लगातार मानसून की बेरुखी से पिछड़े मानसून सत्र से बांध में पानी लगातार छिजने लगा है। धान की रोपाई के कारण कर्मनाशा सिस्टम की राईट कर्मनाशा लेप्ट कर्मनाशा मुख्य नहरों के साथ ही जनकपुर माइनर भी लगातार चल रही है । वही बांधों के पानी पर निर्भर कौड़िहार, बनभीषमपुर, भूसी पूर्वी, भूसी पश्चिमी लिफ्ट कैनाल भी संचालित है। कर्मनाशा सिस्टम की नहरों के फुल गेज पर चलाने पर 70 मिलियन घनफूट पानी प्रतिदिन खर्च होता है। वर्तमान में कर्मनाशा सिस्टम के बांधों में 3000 मिलियन घनफूट पानी मौजूद है। इस प्रकार देखा जाए तो सिस्टम में अब भी एक मांह के ऊपर का पानी मौजूद है। वहीं बरसात नहीं होती है तो धान की खेती पर संकट खड़ा हो सकता है।सिंचाई विभाग के सूत्रों के मुताबिक कर्मनाशा सिस्टम के नौगढ़ बांध का वर्तमान जलस्तर 885 फीट हो गया है । जो जून माह से पांच फीट खिसक गया है। इस बांध से 1200 क्यूसेक पानी मूसाखाड बाद में छोड़ा जा रहा है। मूसाखाड बांध का वर्तमान जलस्तर नौगढ़ बांध से पानी आने के बाद भी 342 फीट पर है। जबकि जून माह में बांध का जलस्तर 346 फीट था। चंद्रप्रभा प्रखंड के अधिशासी अभियंता सर्वेश चंद्र सिंहा के अनुसार बांधों में मौजूद पानी से सिस्टम पर आधारित खेतों की रोपाई तथा कुछ दिनों तक सिंचाई हो सकती है। बरसात होने पर ही धान की खेती संभव है।