नौगढ़। जिले के वनांचल क्षेत्र नौगढ़ के 43 गांवों में गर्मी शुरू होते ही पानी का संकट शुरू हो गया है। मार्च के पहले सप्ताह से ही 13 गांवों में हैंडपंप खराब हो चुके हैं। कुओं में भी पानी नीचे जाने लगा है। इसके अलावा 6 गांवों में पानी नहीं की व्यवस्था नहीं होने से लोग आज भी चुआड़ का पानी पीने को विवश हैं। दो गांवों के लोग आज भी दो किमी दूर से पानी ढोकर लाने के लिए विवश हैं।
नौगढ़ में कागज पर भले हों गांवों में टैंकर से पीने के पानी की व्यवस्था की जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई गांवों में पानी का टैंकर भी नहीं पहुंच पाता है। मलवारिया और धोबही गांव के लोगों को पानी के लिए दो किमी तक जाना-आना पड़ता है। नौगढ़ के देवरी कला, लौवारी कला, औरवाटाड़, सेमरसाधोपुर, पथरौर, शाहपुर मालेवर, धनकुवारी, केसार बैरगाढ़ हरियाबांध, चुप्पेपुर, गढ़वा गांव में हैंडपंप और कुएं भी जवाब देने लगे हैं। पानी नहीं होने की वजह से हैंडपंप जवाब दे चुके हैं। वहीं होरिला, सेमर, शाहपुर, लौवारी कला, देवरी कला पांडी, गहिला में ग्रामीण चुआड़ का पानी के पीने के लिए विवश हैं। धोबही गांव के शंकर, महावीर, सुरेंद्र, गोपी, रामेश्वर, उर्मिला, राधिका, गुलाबी, मालती, रामरती, मुनिया ने बताया कि प्रशासन हैंडपंप रीबोर नहीं करा रहा है। इससे पीने के पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी के मौसम में वनांचल क्षेत्र में मवेशियों और जंगल में रहने वाले जंगली जानवरों को भी पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। इन्सान तो किसी तरह पानी का जुगाड़ कर लेते हैं, लेकिन मवेशियों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। ऐसे में गर्मी से पहले 10 से ज्यादा गांवों के लोग अपने मवेशियों को अपने रिश्तेदारों के यहां भेज देते हैं। जिन लोगों के यहां मवेशी हैं, उनको पानी के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सिंचाई न होने से फसल नहीं तैयार हो पाती है। जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता अमित कुमार रघुवंशी का कहना है कि पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए 250 करोड़ की लागत से नई पेयजल परियोजना पर काम किया जा रहा है। जल्दी ही नौगढ़ के लोगों को पेयजल मिलने लगेगा।