एक तरफ जल संचय व स्रोत बढ़ाने के सरकार प्रयास कर रही है तो दूसरी तरफ रेलवे कालोनियों में प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। अबाध पानी गिरने से र्क्वाटरों के दीवार खराब हो रहे हैं तो जलजमाव से नारकीय स्थिति बन रही है। पानी की बर्बादी के बावजूद न रेल कर्मचारी कोई आवाज उठा रहे हैं न हीं विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है।
मुगलसराय में 16 रेलवे कालोनिया हैं। इसमें 5290 रेलवे क्वार्टर बने हैं। इन कालोनियों में रेल की सेवा करने के कर्मचारी व अधिकारी परिवार के साथ निवास करते हैं। इनकी सुख सुविधा के रेलवे कई व्यवस्थायें दी हैं। रेलवे कालोनियों के क्वार्टरों में पानी की आपूर्ति करने के जगह जगह ओवर हेड टैंक बनाए गए हैं। यही नहींओवरहेड टैंक से पाइप के जरिए क्वार्टरों तक पहुंचने वाला पानी जमा हो सके, इसके लिए अधिकतर कालोनियों के क्वार्टरों की छत पर सीमेेंटेड अथवा प्लास्टिक की टंकियां रखी गई है। इन टंकियों की क्षमता पांच सौ लीटर पानी भरने की है। ओवरहेड टैंक से सुबह, शाम और दोपहर में एक एक घंटे पानी की आपूर्ति की जाती है। तीन वक्त पानी की आपूर्ति से क्वार्टर की छत पर स्थापित टंकी जल्दी भर जाता है और इसके बाद टंकी ओवरफ्लो होने लगती है।
एक अनुमान के मुताबिक एक क्वार्टर से एक घंटे में सौ से दो सौ लीटर पानी नीचे गिरकर बर्बाद होता है। इस तरह सभी कालोनियों को देखा जाए तो प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। लगातार पानी गिरते रहने से आवासों की दीवार भी कमजोर हो रही है। वहीं क्वार्टरों में निवास करने वाले रेलकर्मी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। रेलवे भी जल संचय करने के लिये बंद एसी के कमरों में बैठक कर पानी बचाने की वकालत करते हैं। लेकिन कालोनियों में हो रहे पानी की बर्बादी रोकने का इंतजाम नहीं किया जा रहा है।