चंदौली। निजी स्कूलों के प्रबंधकों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को डीएम नवनीत सिंह चहल और जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. विनोद कुमार राय से मिला। स्ववित्तपोषित विद्यालयों के प्रबंधकों ने सरकार के फीस न लेने के आदेश से उत्पन्न हुई वित्तीय संकट से अवगत कराने के साथ ही शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं निजी विद्यालयों में परिवहन सेवाएं दे रहे चालक और कंडक्टर के वेतन भुगतान में सरकारी अंशदान दिए जाने की मांग की। प्रबंधकों ने बिजली बिल, भवन एवं जलकर के अलावा अन्य टैक्स में छूट देेने की मांग उठाई।
प्रबंधकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंप कर कहा कि शुल्क ही निजी विद्यालयों के आय का एकमात्र स्रोत है। सरकार ने निजी विद्यालयों को शुल्क संबंधित आदेश जारी किया गया, जिससे वित्तीय संकट उत्पन्न हो गया। आदेश के बाद विद्यालयों को नाम मात्र शुल्क प्राप्त हुए हैं। ऐसे में शिक्षकों व विद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे अन्य स्टाफ का वेतन दे पाना मुश्किल हो गया है। इससे शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी व सहायक कर्मचारियों का परिवार वेतन के अभाव में तमाम कठिनाइयों का दंश झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परिवहन शुल्क लेने की भी मनाही के कारण ड्राइवर व कंडक्टर का वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सरकार निजी विद्यालयों को वेतन जारी करने के यथासंभव अंशदान प्रदान करे। इसके अलावा वाहनों के बीमा, फिटनेस टैक्स, भवन व जलकर, विद्युत फिक्स चार्ज व सरचार्ज, वाहन ऋण से जुड़े ब्याज व मासिक किस्त के भुगतान में छुट प्रदान करें। इस पर डीएम ने कहा कि विद्यालय में केवल अप्रैल, मई व जून का वाहन शुल्क माफ है। शिक्षण शुल्क सभी अभिभावकों को देना है। एक साथ तीन महीने के शुल्क के लिए विद्यालय अभिभावकों पर दबाव नहीं बनाएंगे। पर एक एक महीने का शुल्क मांग सकते हैं। जो अभी नही दे पाएंगे उन्हें जुलाई के बाद इस तीन महीनों की फीस जोड़कर देना है। ज्ञापन सौंपने वालों में यदुराज कानुडिया, अरुण कुमार अग्रवाल, सूर्यमुनी तिवारी, हाजी वसीम अहमद, विनय वर्मा, खान मोहम्मद अनीस, आशीष विद्याथीऱव्, डॉ. अनिल यादव, मनोज यादव, राम दयाल बिंद रहे।