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Vat Savitri Vrat 2026: निर्जला व्रत रख सुहागिनों ने की बरगद वृक्ष की पूजा, पति की दीर्घायु की कामना की

Sat, 16 May 2026 04:25 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली।

सार

Chandauli News: वट सावित्री व्रत रखकर महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत लपेटा और अपने सुहाग की रक्षा एवं पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की।  
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पूजा करतीं महिलाएं - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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हिंदू धर्म की आस्था, परंपरा और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना का प्रतीक वट सावित्री व्रत शनिवार को टांडाकला क्षेत्र में श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। ग्राम सभा स्थित रामशाला प्रांगण में सुबह से ही सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सोलह श्रृंगार और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने बरगद (वट) वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

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अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर महिलाओं ने कठोर निर्जला व्रत रखा। रामशाला प्रांगण के चबूतरे पर एकत्र होकर उन्होंने वट वृक्ष को फल, फूल, नारियल, सिंदूर, धूप-दीप और अक्षत अर्पित किए। इसके बाद महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर कच्चा सूत लपेटा और अपने सुहाग की रक्षा एवं पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की। पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, भजन और धार्मिक गीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

पूजन के उपरांत महिलाओं ने एकत्र होकर पतिव्रता माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा का श्रवण किया। कथा में बताया गया कि माता सावित्री ने अपने तप, श्रद्धा और अटूट संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। कथा सुनने के बाद महिलाओं ने आरती उतारी और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की शुभकामनाएं दीं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इसकी दीर्घायु और विशालता को वैवाहिक जीवन की स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति के लिए लंबी उम्र और परिवार के कल्याण की कामना करती हैं।

आधुनिकता के इस युग में भी महिलाओं की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति गहरी आस्था देखने को मिली। जेठ की भीषण गर्मी के बावजूद महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ व्रत और पूजा संपन्न की। पूजा के बाद उन्होंने बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और सुहाग सामग्री का आदान-प्रदान किया। आयोजन के दौरान स्थानीय युवाओं ने व्यवस्था और सहयोग की जिम्मेदारी संभाली।

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