कंचन के पिता नरेश कुमार और माता वंदना देवी ने उनकी पढ़ाई और तैयारी में हर संभव सहयोग दिया। परिवार के सदस्यों का कहना है कि कंचन शुरू से ही मेहनती और अनुशासित रही हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के मार्गदर्शन और शिक्षकों के सहयोग को दिया है।
कंचन ने अपनी सफलता के पीछे नियमित अध्ययन, सही रणनीति और समय प्रबंधन को अहम बताया। उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने लगातार आत्मविश्वास बनाए रखा और अपने लक्ष्य से कभी विचलित नहीं हुईं। कंचन की इस उपलब्धि की जानकारी मिलते ही कृष्णानगर कॉलोनी समेत पूरे चंदौली जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोग, रिश्तेदार और शुभचिंतक उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।
कंचन गुप्ता की सफलता क्षेत्र के युवाओं, खासकर छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।कंचन का यह सफर न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व की बात है।