कमालपुर। महुजी में गंगा नदी में शनिवार को नाव डूबने से पांच लोगों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। रविवार को एक शव बरामद होने के बाद जब सोमवार की शाम करीब चार बजे एक के बाद एक चार शव गंगा से बाहर निकले तो परिवार वालों पर पहाड़ टूट पड़ा। घर से लेकर घाट तक चीख-पुकार मच गई। रोते-विलखते परिजनों को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई। घटना में एक ही परिवार से दादी और दो पोतियों का शव देखकर लोगों का कलेजा फट गया।
सोमवार को शाम करीब चार बजे इसमें मुरलीपुर निवासी दूधनाथ की पत्नी फूलवासी (60), विरेंद्र की पुत्री ज्योति (10), सचनू की पुत्री कविता (15) और महुजी निवासी रविंद्र की पत्नी उर्मिला (50) का शव जब गंगा से बाहर निकला तो परिवार के लोग शवों से लिपट कर दहाड़े मारने लगे। फुलवासी और उनकी दो पोतियां ज्योति और कविता भी उनके साथ मजदूरी करने गई थीं। परिवार के जीविकोपार्जन में सहयोग करने वाली ज्योति के पिता विरेंद्र और कविता के पिता सचनू अपनी मां और बेटियों के शव को देखकर विलख पड़े। दोनों अपने होश गंवा बैठे। उनको सुध नहीं थी कि आखिर उनके परिवार पर कैसी मुसीबत आ गई।
इस ह़दय विदारक घटना से हर हिल गया। इसमें एक ही परिवार से फुलवासी, ज्योति और कविता की मौत ने परिवार वालों को अंदर से झकझोर दिया है। वहीं महुजी निवासी उर्मिला का शव निकलते ही उसके परिवार में भी कोहराम मच गया। पति बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े। आसपास के गांवों के लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने पीड़ित परिवार वालों को किसी तरह ढांढस बंधाया। वहीं धानापुर-जमानिया मार्ग पर जो भी गुजरा वाकया जानकर हतप्रभ रह गया। इधर गंगा से शव निकलने के बाद पुलिस किसी तरह सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रवाना हो गई।
शनिवार की शाम गाजीपुर के धरम्मरपुर से आलू बीनकर घर लौट रही महिलाओं से भरी नाव महुंजी गांव के सामने गंगा में पलट गई थी। जिसमें सवार करीब 40 लोगों में दो महिलाएं सहित पांच किशोरियां गंगा में डूब गई थी। इसकी जानकारी होते ही महुंजी, मुरलीपुर बिंदपुरवा गांव में हाहाकार मच गया था। घटना के बाद आनन-फानन में लापता पांच लोगों की तलाश शुरू हुई थी। तीसरे दिन सोमवार को सभी शवों को बरामद किया जा सका।
नाव हादसे में जिन पांच लोगों की जान गई है, उनके परिवार को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अलावा जो भी मदद होगी की जाएगी। नवनीत सिंह चहल, डीएम
कमालपुर। गंगा में हुए इस हादसे के बाद लोगों का कलेजा दहल गया है। तब से नाव संचालन ठप है और गांव के तीन से पीड़ित परिवारों के घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। पास पड़ोस के लोगों ने पीड़ित परिवार के बच्चों को कुछ खाने को दिया। जब से नाव हादसा हुआ है। तब से नाव संचालन भी ठप है। परिवार और गांव का कोई भी सदस्य गंगा पार नाव से मजदूरी करने नहीं जा रहा है। झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले मजदूरी कर अपनी जीवन गुजारते हैं। काम पर नहीं जाने से उनके घरों पर दाने तक नहीं है।
पीडीडीयू नगर। पूर्व सांसद रामकिशुन ने कहा कि महुंजी गांव के पास गंगा नदीं में हुआ नाव हादसा दर्दनाक है। सभी पीड़ित परिवारों को सरकार को अविलंब आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए। जिससे दुख और संकट के इस घड़ी में उनकी त्वरित मदद हो सके। उन्होंने कहा कि गंगा सहित जिले में जिन नदियों में नाव का संचालन होता है। वहां शासन और प्रशासन की ओर से सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कि आगे इस तरह की घटनाएं न हों और लोगों की जान न जाए। शनिवार की शाम हुई घटना के बाद देर रात पूर्व सांसद मौके पर भी पहुंचे थे। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवदेना व्यक्त की।
तीसरे दिन लापता लोगों की तलाश में स्थानीय युवकों के साथ महुजी में गंगा नदी में उतर गए। नाविकों के साथ महाजाल और छोटी नाव के सहारे गंगा में उतर कर डूबे लोगों की तलाश। महुजी गांव के अवध बिहारी और मधुबन सहित अन्य युवकों की मदद से सभी शवों को बाहर निकाला गया। वहीं शवों की तलाश में तीन दिन तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी जुटी रही। रविवार को जवानों ने जयोति का शव खोज निकाला था। लेकिन रविवार को कोई शव नहीं निकाल पाए। इधर दोपहर में सूचना मिली की गाजीपुर के मत्सा गांव के पास नदी में शव उतराया हुआ है। पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ग्रामीणों के लेकर वहां गए लेकिन सिर्फ अफवाह थी।