कंदवा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस बार सभी दलों के लिए किसी टेस्ट से कम नहीं हैं। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनावों को सत्ता के सेमीफइनल की तरह देखा जा रहा है। यही वजह है कि सभी प्रमुख सियासी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कोरोना संक्रमण एक तरफ जहां तेजी से बढ़ रहा है वहीं पंचायत चुनाव का सियासी पारा भी लगातार चढ़ता जा रहा है। प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने पंचायत चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इससे गांव देहात की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं हैं। सत्ताधारी दल होने के चलते भाजपा की प्रतिष्ठा सबसे अधिक दांव पर लगी है। इसे लेकर भाजपा के तेजतर्रार सैयदराजा विधायक सुशील सिंह लगातार अपनी विधानसभा के साथ अन्य विधानसभाओं में भी पंचायत प्रत्याशियों को जिताने के लिए सक्रिय हैं। कुछ जगहों पर पार्टी कार्यकर्ता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ अब भी मैदान में डंटे हुए और अधिकृत प्रत्याशियों खेल बिगाड़ने में लगे हैं। वहीं सपा ने भी पंचायत चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। किसान आंदोलन को लेकर उसकी उम्मीदें बढ़ी हैं। यही वजह है कि पार्टी समर्थित प्रत्याशी अभियान व आंदोलनों के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं। पंचायत चुनावों के लिए बसपा भी काफी दमखम के साथ मैदान में है। पार्टी कार्यकर्ता स्थानीय स्तर पर जाकर अधिकृत प्रत्याशियों के लिए वोट भी मांग रहे हैं। हालांकि कहीं कहीं पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करके पार्टी में आए नए लोगों को टिकट दिए जाने से पुराने कार्यकर्ता काफी आहत हैं। इसका असर भी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। राजनीति के पुरोधाओं का कहना है कि यह पंचायत चुनाव 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल होगा। इस बार के पंचायत चुनाव में जिस राजनीतिक दल ने गांव देहात में अपनी पैठ मजबूत बना ली तो आगामी विधानसभा चुनाव जीतना उस दल के लिए काफी आसान हो जाएगा। शायद इसी वजह से सभी पार्टियां अपने -अपने समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए रात-दिन एक किए हुए हैं।