पूर्व सांसद रामकिशुन के पुत्र जिला पंचायत सदस्य संतोष यादव और भतीजे
मुलायम सिंह यादव द्वारा कथित रूप से पार्टी कार्यालय में जमा कराया गया धन
का मामला तूल पकड़ रहा है।
इस मामले में जहां पूर्व सांसद का कहना
है कि धन पार्टी कार्यालय में जमा हुआ है और व्यक्तिगत रूप से उनका कोई
लेना देना नहीं है। वहीं दूसरी तरफ जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी
किरन सिंह का कहना है कि इस मामले को प्रमाण के साथ निर्वाचन आयोग को दे
दिया दिया गया है।
यदि वहां सुनवाई नहीं होगी, तो कोर्ट की शरण ली जाएगी।
वैसे
तो जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान जिला पंचायत सदस्यों की खरीद
फरोख्त के खूब चर्चे लोगों के बीच हुए। इस बीच सात जनवरी को मतदान के
दौरान पूर्व सांसद के पुत्र जिला पंचायत सदस्य संतोष यादव और भतीजा जिला
पंचायत सदस्य मुलायम सिंह यादव को पूर्व सांसद ने वोट देने से रोक दिया था।
बाद में दोनों ने मतदान किया। इस चुनाव में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष
छत्रबली सिंह की पत्नी सरिता सिंह ने 19 वोट पाकर जीत हासिल की है। उधर
रविवार को सपा जिला इकाई के नाम से जारी दो करोड़ रुपये का चेक सामने आ
गया। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि छत्रबली सिंह ने रामकिशुन यादव को
मनाने के लिए दो करोड़ का चेक पार्टी फंड के नाम जारी किया, जबकि एक करोड़
रुपये नगद दिए।
भले ही धन पार्टी फंड में जमा हो, लेकिन विपक्ष ने इसे
सदस्यों की खरीद फरोख्त से जोड़ दिया है।
प्रतिद्वंद्वी किरन सिंह ने कहा
कि उक्त चेक खरीद फरोख्त के लिए था। और भी वोट पैसों के बल पर खरीदा गया
है। प्रमाण के साथ इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग को भेजी गई है।
दूसरी तरफ
पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने कहा कि पूरा पैसा पार्टी फंड में जमा किया
गया है। ऐसे में मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस बाबत छत्रबली
सिंह का कहना है कि उन्होंने चेक जारी नहीं किया है। राजनीति के चलते उनका
नाम सामने किया जा रहा है।