दुलहीपुर। स्थानीय बाजार आज भी उपेक्षा का शिकार है। दुलहीपुर में रोजाना 50 से ज्यादा गांवों के 20 हजार के करीब लोगों का आवागमन होता है। वहीं 300 के करीब दुकानें हैं। वाराणसी से चंदौली को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर यह बाजार स्थित है। बावजूद इसके यहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। बाजार में कहीं एक भी यूरिनल, शौचालय,प्रतिक्षालय और पानी की व्यवस्था नहीं है। वहीं जलनिकासी की व्यवस्था न होने से हमेशा मार्ग पर गंदा पानी बहता रहता है।
वर्ष 1882-83 का बना दुलहीपुर भीतरी बाजार दर्जनों गांवों के मुख्य बाजार है। भिसौडी, करवत, मुहम्मदपुर, बगही, पुरैनी, भूजहुवा, महाबलपुर, सतपोखरी, नीबूपुर, कुंडाकला, मलोखर, साहूपुरी कालोनी, एफसीआई, रसूलपुर, डीबरीयापर सहित व्यास नगर रेलवे स्टेशन मार्ग के किनारे बसे गांवों के ग्रामीण यहां खरीदारी करने आते हैं। बाजार में कपड़े, फर्नीचर, दवा, किराना, बालू सीमेंट, सोने चांदी सहित अन्य वस्तुओं की दुकानें हैं। बाजार के करीब 300 दुकानों पर प्रतिदिन 15 से 20 हजार ग्राहक खरीदारी करने आते हैं। बाजार का प्रतिदिन 50 से 60 लाख रुपये का टर्नओवर है लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है। बाजार में कहीं भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।