वाराणसी के यात्रियों से मुगलसराय रेलवे स्टेशन की आय बढ़ रही है।
नई
दिल्ली जाने वाले लोग वाराणसी के बजाए मुगलसराय से यात्रा करना ज्यादा
सुविधाजनक मानते हैं। इस तरह मुगलसराय से दिल्ली जाने वाले यात्रियों में
चालीस से पैंतालीस प्रतिशत वाराणसी के ही होते हैं। वाराणसी से दिल्ली के
लिए फास्ट ट्रेन न होने की वजह से यात्री मुगलसराय से यात्रा पसंद करते
हैं।
वाराणसी को देश की राजधानी से जोड़ने के लिए रेलवे ने बीस जोड़ी
ट्रेनें चला रखी हैं। इसमें डिब्रूगढ़-राजधानी, काशी विश्वनाथ, शिवगंगा,
मंड़ुआडीह-नई दिल्ली, गरीब रथ आदि प्रमुख हैं।
वाराणसी से इलाहाबाद अथवा
लखनऊ होते हुए दिल्ली जाने का रूट है, लेकिन वाराणसी से चलने वाली वाली बीस
ट्रेनों में से अधिकांश ट्रेनें दिल्ली तक पहुंचने में पंद्रह से सोलह
घंटे लगाती हैं। इसमें भी सर्वाधिक देरी वाराणसी से इलाहाबाद के बीच होती
है। दूसरी तरफ मुगलसराय से दिल्ली जाने के लिए 41 ट्रेनें हैं।
मुगलसराय से
दिल्ली जाने वाली अधिकतर ट्रेनें दस से बारह घंटे का समय लगाती हैं। वहीं,
राजधानी और गरीथ रथ एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें साढ़े आठ से साढ़े नौ घंटे में
ही नई दिल्ली पहुंचा देती हैं।
मुगलसराय से दिल्ली जाने के लिए राजधानी
एक्सप्रेस, कालका मेल, दूरंतो, युवा एक्सप्रेस, नीलांचल, पूर्वा एक्सप्रेस,
नार्थ ईस्ट, मगध, पुरुषोत्तम, ब्रह्मपुत्र मेल, महाबोधि, गरीब रथ, हावड़ा
दिल्ली एक्सप्रेस सहित अन्य महत्वपूर्ण ट्रेन हैं। मुगलसराय से दिल्ली के
लिए प्रतिदिन इन ट्रेनों से पांच हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं।
रेलवे
सूत्रों की मानें तो इसमें चालीस से पैंतालीस प्रतिशत यात्री वाराणसी के
होते हैं। इससे प्रतिदिन रेलवे को अच्छी आय होती है। यदि तकनीकी रूप से
देखें तो वाराणसी से दिल्ली जाने वाली कई ट्रेन वहीं से चलती है और वहां
रिजर्वेशन कराना आसान है। उसकी अपेक्षा मुगलसराय से दिल्ली जाने वाली सभी
ट्रेन दूसरे स्थानों से आती है तथा उन ट्रेनों में यहां से सीटों की संख्या
काफी कम होती है।