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Chandauli News: पशुओं की जांच के लिए तीन लैब, कर्मचारी एक भी नहीं

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जिले में पशुओं के इलाज के लिए तीन प्रयोगशालाएं (पैथालाॅजी लैब) खोली गई हैं। छह साल में आज तक इन प्रयोगशालाओं में एक भी पशु की जांच नहीं हो सकी। पशुपालकों के लिए लैब सिर्फ एक भवन है।
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सत्र 2020- 21 में शास्त्री सेतु के पास पशुचिकित्सा विभाग के मंडलीय कार्यालय परिसर में पहला, दूसरा केंद्र सदर अस्पताल में और तीसरा केंद्र हलिया पशु चिकित्सा केंद्र परिसर में खोला गया। उस समय 35 लाख रुपये इन प्रयोगशालाओं के निर्माण पर खर्च किए गए। विभाग की ओर से दावा किया गया कि प्रयोगशालाओं में इंसान की तरह पशुओं के खून, गोबर या मल, लार की जांच की व्यवस्था है लेकिन यहां जांच करने वाला कोई नहीं है। हलिया में लैब टेक्नीशियन की नियुक्ति न होने के कारण रूर्बन मिशन योजना के अंतर्गत निर्मित राजकीय पशु चिकित्सालय के लैब का प्रयोग नहीं हो पा रहा है।

प्रतिदिन 100 से 150 की होती है ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। पशु चिकित्सालयों में प्रतिदिन 150 पशुओं की ओपीडी होती है। सरकारी तौर पर कोई लैब न होने पर पशुओं की गंभीर स्थिति में पशुपालक बरकछा स्थित बीएचयू के पशु पालन केंद्र जाते हैं या उन्हें वाराणसी जाना पड़ता है। प्रयोगशालाओं में एक पशु चिकित्सक, एक लैब टेक्नीशियन व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की आवश्यकता है।
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वर्जन
किसी कर्मचारी की तैनाती न होने से काम रुका है। शासन को इसके लिए सूचित किया गया है। इस वर्ष तक कर्मचारी मिलने की संभावना है। उसके बाद सभी प्रयोगशालाएं संचालित हो सकेंगी।
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- डाॅ. भूपेंद्र कुमार पाठक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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