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मनरेगा में रोजगार देने में चंदौली सूबे में तीसरा जिला

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चंदौली। मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार दिलाने के मामले में चंदौली सूबे में तीसरे स्थान पर है। जबकि ललितपुर जनपद प्रथम और मीरजापुर दूसरे स्थान पर है। एक दिन में जिले में 4950 मजदूर बढ़े। बहरहाल 61 हजार मजदूरों को नियमित काम मिल रहा है। जबकि वाराणसी ताजा रैकिंग के अनुसार 40वें स्थान पर है। वहीं मंडल के जौनपुर व गाजीपुर में भी मनरेगा की हालत काफी खराब स्थिति में है। जिले में छह हजार से अधिक अप्रवासी मजदूरों का जॉब कार्ड बनाया जा चुका है।
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लॉकडाउन के दौरान घरों में कैद गरीबों को रोजी-रोटी दिलाने के लिए सरकार ने मनरेगा योजना के तहत गांवों में विकास कार्यों को अनुमति प्रदान कर दी थी। शासन के फरमान के बाद कोरोना संक्रमण के बचाव के मानकों का पालन कराते हुए कृषि प्रधान जिले में मनरेगा के तहत काम शुरू हुआ। शुरूआत में रफ्तार धीमी रही, लेकिन उच्चाधिकारियों की सक्रियता के चलते मजदूरों की तादात बढ़ी। शासन ने योजना के तहत एक दिन में नए मजदूरों को जोड़ने के मानक पर प्रदेश के जिलों की समीक्षा की थी। इसमें चंदौली का प्रदेश में तीसरा स्थान रहा। जनपद में एक दिन में 4950 मजदूर बढ़े। जबकि 9000 मजदूरों की संख्या के साथ ललितपुर पहले और 5140 मजदूर बढ़ने से पड़ोसी जिला मीरजापुर दूसरे स्थान पर रहा। प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत मंडल में शामिल अन्य जिले इस मामले में फिसड्डी साबित हुई। वाराणसी में एक दिन जहां सिर्फ 445 मजदूर बढ़े और प्रदेश में 40वां स्थान रहा। वहीं महज 475 मजदूजर बढ़ने से जौनपुर का 37वां और 397 मजदूरों बढ़ने पर गाजीपुर का 42वां स्थान था।
शासन के निर्देश पर जिले में मनरेगा के तहत लोगों को गांव में रोजगार देने के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है। एक दिन में मजदूरों को रोजगार दिलाने के मामले में सूबे में चंदौली को तीसरा स्थान मिला है। बाहर से आने वाले छह हजार से अधिक अप्रवासी मजदूरों का जॉब कार्ड बनाकर उन्हे रोजगार दिया गया है। डा. एके श्रीवास्तव, सीडीओ।
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