जिला अस्पताल में मरीजों की जांच के बाद दवा लिखते चिकित्सक संजय कुमार
गर्मी चरम पर है। मौसम के बदलते मिजाज के साथ डायरिया, मलेरिया और डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका प्रबल हो गई है। बावजूद इसके सरकारी अस्पतालों में इससे निपटने की अभी तक कोई भी तैयारी नहीं की गई है। सरकारी इंतजाम अभी नदारद हैं। कुल मिलाकर इलाज की व्यवस्था रामभरोसे है।
जनपद वासियों को स्वस्थ रखने के लिए जिले में दो जिला अस्पताल, एक महिला अस्पताल संग चार समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दो नगरीय स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा संक्रामक रोगों के मरीजों का दबाव पंडित कमलापति त्रिपाठी राजकीय जिला अस्पताल पर रहता है। मौसमी उतार चढ़ाव शुरू होते ही अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। सरकारी अस्पतालों में उचित व्यवस्था न मिलने के कारण लोग निजी चिकित्सालयों की ओर रुख करने को विवश हैं। जिला अस्पताल चंदौली की स्थिति यह है कि सभी बेड फुल हैं। संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों को अलग रखने के लिए अभी तक स्पेशल वार्ड किसी भी चिकित्सालय में नहीं बनाए गए हैं।
सौ बेड वाले चकिया संयुक्त चिकित्सालय में भी संक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था नहीं की गई है। इससे दूसरे मरीजों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भा्ेगवारे की स्थिति तो और भी बदतर है। हालात यह हो चुके हैं कि यहां अब कोई मरीज जाता ही नहीं। इसी प्रकार सीएचसी धानापुर, सकलडीहा, नौगढ़ और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी चिकित्सक पीड़ितों को दवाइयां तो उपलब्ध करा दे रहे हैं लेकिन भर्ती की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।