भारत खंडे संस्कृत विश्वविद्यालय एवं नार्दर्न कोल इंडिया के सहयोग से सोनचिरैया की प्रस्तुति रिमझिम बरसे बदरिया कजरी पर आधारित चार दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन भी लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने 50 से अधिक लोगों को कजरी का प्रशिक्षण दिया।
मालिनी अवस्थी नेबताया कि उनका बचपन पड़ोस जनपद मिर्जापुर में ही बीता है। और वह मां विंध्यवासिनी को अपनी कुलदेवी मानती हैं। जब भी उनका मन जंगली इलाकों में घूमने और चिड़ियों की चहचहाहट और वहां की खूबसूरती को देखने का मन करता है तब वह 5 साल के बच्चे की तरफ भाग कर चंदौली के वनांचल की वादियों में आ जाती है।
और कुछ दिनों तक रहकर यही अपना समय व्यतीत करने के साथ ही कजरी को भी सूट उसे राष्ट्र स्तर तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले वर्ष भी इसी क्षेत्र में आईं थीं और कजरी की प्रस्तुति कर उससे देशभर में सुनने का काम किया।
मालिनी अवस्थी ने बताया कि भारत खंड संस्कृति यूनिवर्सिटी लखनऊ से करीब 25 की संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ ही साथ मेरठ, दिल्ली, गाजियाबाद, छतरपुर,गोंडा, बक्सर, प्रयागराज, कोलकाता, इत्यादि जगहों से भी काफी संख्या में युवक युवतियां और महिलाएं भी आई हुई है।
जिनको वह चंद्रप्रभा अभ्यारण के सुरम्य वादियों में कजरी के माध्यम से तमाम चीजों का प्रशिक्षण दे रही हैं। जिससे आने वाली पीढ़ी को कुछ नया सीखने के साथ ही भविष्य में जमीन से मंचों तक पहुंचाने का मौका मिल पाएगा। और वह एक नई ऊंचाइयों को हासिल कर पाएंगे।
उन्होंने बताया कि वनांचल में बैठ कर कजरी की प्रस्तुति करने का एक अलग ही सुकून है। वह बड़े और अच्छे मंचों पर भी नहीं मिल पाता है।