मुख्य विकास अधिकारी तथा परियोजना निदेशक के साथ ही एडीओ पंचायत को भी हटाने की मांग सहित विकास संबन्धित कई मुद्दो केा लेकर पिछले नौ दिनो से विकास खंड कार्यालय परिसर में धरना दे रहे ग्राम प्रधानों का अनिश्चितकालीन धरना दसवें दिन भी जारी रहा। इस दौरान प्रधानों ने धरने के प्रति प्रशासनिक उपेक्षा का आरोप लगाते हुये आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
विकास कार्यो में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा हर विकास कार्य में अधिकारियों की कमीशन खोरी के कारण विकास कार्यो में आ रहे गतिरोध तथा कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने से ग्राम पंचायत स्तर पर जिम्मेदार प्रधानों की किरकिरी हो रही है, लेकिन विकास कार्यो में बराबर के भागीदार विकास अधिकारियों तथा कर्मचारियों के पौ-बारह हैं।
जिले में पहली बार कमीशन खोरी तथा विकास विभाग के भ्रष्टाचार के विरोध में प्रधानो का आंदोलन कितना सार्थक होगा इसे लेकर बुद्धिजीवी वर्ग में चर्चाओं का माहौल गर्म है। कई लोग इस आंदोलन के औचित्य पर ही सवालियां निशान लगा रहे है। विकास कार्यो में भ्रष्टाचार, कमीशन खोरी, भेदभाव का सीलसिला लोगो को खटक रहा है। भ्रष्टाचार तथा कमीशन खोरी के चलते विकास विभाग सहित जिले के अन्य विभागों के कर्मचारियों, अधिकारियों का बढता जीवन स्तर भी लोगो की धारणा को नया आयाम दे रहा है। जहां तक प्रधानो के आन्दोलन का प्रश्न है, तो आन्दोलन को लेकर युवा वर्ग खासा उत्साहित दिख रहा है, लेकिन यथा स्थितिवादी लोगों की धारणा जस की तस है। इसी का फायदा उठाकर प्रशासन भी आन्दोलन के प्रति उदासीन नजर आ रहा है। धरने के दौरान प्रधान संघ के ब्लाक अध्यक्ष बब्बन यादव, दिवाकर मौर्या, रामदुलारे मिस्त्री, राजेश शर्मा, रामविलास पाल, धर्मेन्द्र यादव, काशीनाथ सिंह, राजेन्द्र मौर्या, रणजीत यादव, रामचन्दर बिंद मौजूद रहे।