पीडीडीयू नगर। वाराणसी से 1997 में अलग होकर जिला बने चंदौली में 28 साल बाद आज भी हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। करीब 21 लाख की आबादी वाला यह जिला हृदय रोग उपचार के मामले में अब भी वाराणसी पर निर्भर है। विडंबना यह है कि इसको लेकर किसी ने एक बार भी प्रयास नहीं किया। जिला अस्पताल के ओपीडी में हर महीने दो हजार से अधिक और इमरजेंसी में लगभग 500 हृदय संबंधी मरीज पहुंचते हैं। ठंड के मौसम में यह संख्या इमरजेंसी में ही 800 से ऊपर पहुंच जाती है।
जिले में नवंबर के आखिरी सप्ताह में दिन में धूप हो रही है तो शाम होते ही ठंड लगने लग रही है। तापमान में भी दिन और रात में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। कभी औसत से दो डिग्री सेल्सियस तो कभी चार डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान हो रहा है। जिस तरह से मौसम में बदलाव हो रहा है, इसमें छोटी सी लापरवाही भी सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में हार्टअटैक, तेज बुखार, खांसी, सांस फूलने के साथ ही नसों में खून जमने की समस्या बढ़ जाती है।
प्रदेश के आकांक्षात्मक जिले में शुमार चंदौली में दो जिला संयुक्त चिकित्सालय, पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं लेकिन कहीं भी हृदय रोग विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं है। जबकि जिला अस्पताल के ओपीडी में हर महीने दो हजार से ज्यादा और इमरजेंसी में 500 के करीब हृदय रोग से पीड़ित लोग आते हैं। इमरजेंसी के सभी मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। ठंड में हृदय रोगियों की संख्या इमरजेंसी में ही 800 के पार हो जाती है।
जिले के ग्रामीण अंचलों से वाराणसी तक की दूरी 40 से 70 किलोमीटर के बीच है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह दूरी और उपचार का खर्च दोनों चुनौतियां बने हुए हैं। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजी से जुड़ी प्रमुख जांच सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। पद सृजित होने और नियुक्ति के प्रस्ताव कई बार भेजे जाने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
सर्दियों में ठंड के कारण शरीर में बहने वाला रक्त गाढ़ा हो जाता है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से रक्त शरीर में अच्छे से फ्लो नहीं हो पाता, जिसके कारण हार्ट को पंप करने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है जिस कारण से हार्ट अटैक हो जाता है।