चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में अब एक बार फिर से जंगली जानवरों की चहलकदमी देखने को मिलेगी। प्रदेश के किसी भी जिले में रेस्क्यू कर पकड़े गए जंगली जानवर चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य बिहार में छोड़े जाएंगे। वन विभाग के इस निर्णय से चंद्रप्रभा अभयारण्य में वन्य जीवों की संख्या बढ़ेगी। इस दिशा में पहला कदम 22 सितंबर को उठाया गया। बिजनौर से एक तेंदुए को लाकर चंद्रप्रभा अभयारण्य में छोड़ा गया। वन विभाग के अधिकारियों मानना है कि इस पहल से चंद्रप्रभा जंगल में जैव विविधता मजबूत होगी। पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बेहतर होगा। जानवरों की संख्या बढ़ने से जंगल में वन्य जीवों के शिकार और लकड़ी की कटान पर लगाम लगेगी। अधिकारियों का कहना है कि चंद्रप्रभा जंगल में बाहर से आने वाले जानवर यहां की प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बैठा लेते हैं। इसलिए चंद्रप्रभा को वन्य जीवों के पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विभाग के इस कदम से पर्यटक चंद्रप्रभा अभयारण्य में दुर्लभ वन्य जीवों को देख सकेंगे। चंद्रप्रभा अभ्यारण जल्द ही इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन जाएगा। वन विभाग की ओर से सड़क किनारे और सेंचुरी एरिया में पिकनिक मनाने आने वाले पर्यटकों को चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने लाेगाें से जंगल में पिकनिक न मनाने की अपील की है। कभी भी झाड़ी से अचानक जंगली जानवर निकल सकते हैं। विभाग का कहना है जंगल में शांति जरूरी है। अखिलेश कुमार दुबे रेंजर चंद्रप्रभा अभयारण्य ने बताया कि चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में वन्य जीवों की संख्या बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है। रेस्क्यू किए गए जानवरों को यहां छोड़ने से जैव विविधता भी सुदृढ़ होगी और जंगल का प्राकृतिक संतुलन भी कायम रहेगा। ग्रामीणों और पर्यटकों से अपील हैं कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें।