जौनपुर से आए रामेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म लेने के बाद भी
पुण्य और पाप का भेद न कर पाना अत्यंत दुखद है।
वर्तमान परिवेश में पूरी
दुनिया अर्थ के पीछे दौड़ रही है। ऐसे में हमारे धार्मिक संस्कारों के नष्ट
होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसे बचाने के लिए सभी को सतत प्रयत्न
करने की जरूरत है।
सुल्तानपुर से पधारी कथा वाचिका बंदना शास्त्री ने कहा
कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने जीवन में अनेक परेशानियों का सामना
करते हुए भी सत्य मार्ग को नहीं छोड़ा।
श्रीराम ने अनेक कष्टों को सहने के
बाद भी अपने भाइयों को सुख दिया। कैलाश उपाध्याय, सतीश सिंह, हरीश सिंह,
इंचल बाबा, मुसाफिर उपाध्याय, कपिलदेव उपाध्याय, सियाराम यादव, नितिन सिंह
आदि मौजूद रहे।