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Chandauli News: 20 दिन में ही सड़कों से गायब हो गईं जिले को मिलीं चार रोडवेज बसें

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औराई। करीब 20 दिन पहले जिले को मिलीं चार रोडवेज बसें सड़कों से गायब हो गई हैं। औराई बस स्टेशन से धूमधाम से बसों का शुभारंभ किया गया था लेकिन कुछ ही दिनों में बसों का अता-पता नहीं चल रहा है। इन बसों का संचालन ग्रामीण इलाकों के लिए किया गया था। बसों के न चलने से एक बार फिर लोग निजी वाहनों के सहारे हो गए हैं। जिले में तीन-तीन रोडवेज बस स्टेशन हैं। इनमें औराई रोडवेज स्टेशन हाईवे पर होने के कारण कुछ हद तक ठीक है लेकिन ज्ञानपुर और भदोही रोडवेज स्टेशन वीरान पड़ा रहता है। यहां कभी-कभी ही बसें दिखती हैं। दिन में एक या दो बार बसें आती जरूर हैं लेकिन परिसर में खड़ी भी नहीं होतीं। जिले के ग्रामीण रूटों पर बसों का संचालन न होने से काफी परेशानी होती थी। इसे देखते हुए करीब 20 दिन पहले औराई बस स्टेशन पर जिले को सांसद, विधायक, आरएम और एआरएम की मौजूदगी में चार नई बसों की सौगात दी गई। इन बसों को वाराणसी से चलकर सेमराध नाथ, धनतुलसी, दुर्गागंज और रोहीं के रूटों पर चलाया जाना था। अब स्थिति यह है कि ये बसें जिले की सड़कों से गायब हो गई हैं। बसें आती भी हैं तो वाराणसी से चलने के बाद सीधे औराई बस स्टेशन में न जाकर फ्लाईओवर के ऊपर से निकल जाती हैं। इसके अलावा उनका जनपद में कहीं ठहराव भी नहीं होता। जिले के विभिन्न रूटों पर 55 निजी बसें चलाई जाती हैं। सभी निजी बसों में यात्री भी खूब होते हैं लेकिन इसके उलट भदोही में रोडवेज बसों का अता-पता नहीं होता। आंकड़ों के मुताबिक अगर निजी बसें 40 सीटर भी हैं तो हर दिन केवल बसों से ही सवारी करने वाले 1400 से 1500 लोग हैं। ये बसें दिन भर में कम से कम तीन से चार चक्कर काटती हैं। इस लिहाज से हर दिन जिले में बसों से सवारी करने वालों की संख्या ही 15 से 20 हजार के ऊपर है। इसके बाद भी रोडवेज निगम की लापरवाही से लोगों को लाभ नहीं मिल पाता। रोडवेज बसों के मुकाबले निजी बसें थोड़ी सस्ती जरूर होती हैं लेकिन उनमें खतरा भी होता है। गोपीगंज से प्रयागराज की यात्रा के लिए निजी बसों में जहां 70 से 75 रुपये देने पड़ते हैं, वहीं रोडवेज का किराया केवल 89 रुपये है। इसी तरह अन्य रूटों पर भी किराया तो सस्ता होता है लेकिन सफर में खतरा भी रहता है। दूसरी तरफ रोडवेज का सफर सुरक्षित माना जाता है।
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