गया में माओवादियों की बिछाई गई लैंड माइंस विस्फोट में मंगलवार को शहीद
हुए सीआरपीएफ जवान गुलाब का शव बुधवार की शाम सवा चार बजे जैसे ही गोपालपुर
गांव पर उसके घर पहुंचा, समूचे गांव में मातम छा गया।
हर किसी की
आंखें नम दिखीं। गुलाब यादव मंगलवार की अपराह्न साढ़े तीन बजे कांबिंग के
लिए निकले थे। मंगलवार की रात ही साढ़े दस बजे उनके शहीद होने की सूचना
परिवार वालों को मिली। हवलदार पद पर प्रमोशन के बाद गुलाब की पहली पोस्टिंग
गया में थी।
शव को देखते ही पत्नी सविता देवी (40), पुत्र विकास (15),
विशाल(11) और पुत्री रुचि (13), सीआरपीएफ के सूबेदार पद से रिटायर्ड पिता
रामजी यादव और बड़े भाई मुसाफिर यादव फफक पड़े।
अंतिम दर्शन के लिए आसपास
के काफी लोग जुटे रहे। इस दौरान सीआरपीएफ के गार्ड कमांडर रामजी बिंद के
साथ चार कांस्टेबलों ने गार्ड ऑफ आनर दिया। इस अवसर पर क्षेत्राधिकारी
सकलडीहा श्यामदेव बिंद, पुलिस अधीक्षक चंदौली मुनिराज जी, थानाध्यक्ष धीना
कमलेश्वर सिंह, सब इंस्पेक्टर लल्लन यादव सहित अन्य लोग शामिल थे।
इसी
क्रम में सीआरपीएफ कमांडेंट 148 बटालियन सुरेंद्र चौधरी ने भी अपने पंद्रह
जवानों के साथ 26 राउंड फायरिंग कर गार्ड आफ आनर दिया। 148वीं बटालियन के
कमांडेंट सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा परिवार वालों को
पंद्रह लाख, केंद्र सरकार बीस लाख रुपये ग्रेजुटी के सात लाख रुपये तथा शेष
नौकरी का पूरा वेतन पत्नी को मिलता रहेगा। पत्नी को नौकरी तथा पुत्र के
बालिग होने पर नौकरी दी जाएगी।
इस दौरान भाजपा नेता डा. हरेंद्र कुमार राय,
राणा प्रताप सिंह, सुनील श्रीवास्तव, राम नगीना यादव आदि रहे। 1993 में
सीआरपीएफ में भर्ती हुए गुलाब का अंतिम संस्कार गुरैनी गांव के गंगा घाट पर
हुआ। सीआरपीएफ कमांडेट कोबरा बटालियन दिलीप मलिक ने अंतिम संस्कार हेतु
15000 रुपये नकद दिए।