स्कूलों के नये सत्र की शुरुआत होते ही निजी विद्यालयों के प्रबंधकों ने किताब और यूनिफार्म बदल दी है। इससे अभिभावकों जेब ढीली हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल के प्रबंधक अपनी मनमानी कर रहे हैं और प्रत्येक वर्षनई किताबों और ड्रेस खरीदने के लिए कह रहे हैं, जो कि काफी महंगी पड़ रहीहैं। कक्षा एक से लेकर पांच तक के बच्चों की किताबें डेढ़ हजार से लेकर 3000 तक के बीच में आ रही हैं। वहीं विद्यालय प्रबंधक कुछ चुनिंदा दुकानों पर अपने विद्यालय की पुस्तकों को रखवा दे रहे हैं, जिससे अभिभावक निर्धारित दुकानों से किताबें और ड्रेस लेने को विवश है।