चुनाव के लिए टिकट वितरण में उत्पन्न विवाद के बाद सपा मुखिया द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाले जाने बाद पार्टी में पुन: वापसी की मांग को लेकर युवा कार्यकर्ताओ ने जमकर नारेबाजी की । जिले में भी इसका असर रहा लेकिन इन दो दिनों के बीच बड़े नेता इन सबसे दूर रहे । शनिवार की सुबह हाने के बाद जैसे जैसे बीतते वक्त के साथ लखनऊ में गतिविधियां बदलती रहीं वैसे वैसे यहां के नेता भी अपनी चाल बदलते रहे ।
पिछले छह माह से समाजवादी पार्टी में शीर्ष स्तर पर शह मात का खेल हो रहा है । अखिलेश यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाये जाने और रामगोपाल को पार्टी से निकाले जाने पर कई दिनों तक राजनीतिक खेल चलता रहा । जब सब कुछ सामान्य हो गया तो यहां भी लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन टिकट बंटवारे व अधिवेशन बुलाने पर सपा सुप्रीमो ने शुक्रवार को अखिलेश यादव और राम गोपाल यादव को छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
इसके बाद अखिलेश यादव के समर्थन एवं पार्टी में उनकी पुन: वापसी के लिए युवा कार्यकर्ता पूरी शिद्दत से शुक्रवार की रात ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। शनिवार को भी इसके लिए युवा कार्यकर्ता जुटे रहे। लेकिन वक्त बीतने के साथ लखनऊ ने विधयाकों का समर्थन अखिलेश यादव को मिलने लगा तो वैसे ही चंदौली में जिले स्तर के नेता भी अखिलेश के समर्थन में उतर आये । बकायदे जुलुस तक निकाला गया। लखनऊ में विधायकों द्वारा अखिलेश यादव का खुलकर समर्थन किये जाने से यहां के पुराने नेताओं ने भी पैंतरा बदलने में देर नहीं की।