वर्ष के पहले चंद्रग्रहण के कारण मंगलवार को जिले भर के देवालयों के कपाट दिनभर बंद रहे। ग्रहण काल में पूजा-पाठ नहीं हुआ। ग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिरों की साफ-सफाई कर देव विग्रहों की विशेष आरती उतारी गई और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर इस वर्ष चंद्रग्रहण लगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे हुई। खग्रास की स्थिति शाम 4:34 बजे से प्रारंभ हुई, ग्रहण का मध्य 5:33 बजे रहा और समापन 6:47 बजे हुआ। भारत में ग्रहण दृश्य होने के कारण सूतक सुबह 6:20 बजे से ही प्रभावी हो गया। सूतक काल में पूजा-पाठ वर्जित रहने से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। नगर के जीटी रोड स्थित प्राचीन काली मंदिर, रेलवे स्टेशन स्थित हनुमान मंदिर, नई सट्टी का शिव शक्ति दुर्गा मंदिर, शनि मंदिर, कैलाशपुरी का शिव मंदिर, रविनगर का काली मंदिर, गल्ला मंडी स्थित दुर्गा मंदिर, एलबीएस कटरा का संकट हरण दरबार, आरपीएफ कॉलोनी स्थित शिव मंदिर, शाहकुटी शिव मंदिर, मानसनगर शिव मंदिर और गया कॉलोनी का काली मंदिर सहित अन्य देवालयों में दिनभर ताले लटके रहे।
इसी तरह शहाबगंज के सिहोरिया माता मंदिर, मंगरौर गांव के मां मंगला गौरी मंदिर, बरहुआं, सैदूपुर, शाहपुर, मनकपड़ा, पालपुर और खरौझा के मंदिरों के पट बंद रहे। चकिया के प्राचीन काली मंदिर और सकलडीहा के कालेश्वरनाथ मंदिर में भी ग्रहण काल में पूजा स्थगित रही।