सकलडीहा। प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए तमाम तरह की बातें की जा रहीं हैं लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और है। सीएचसी सकलडीहा पर डिजिटल एक्सरे व ईसीजी मशीन टेक्नीशियन के अभाव में बंद है। 30 बेड का अस्पताल होने के बाद भी मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। जांच के लिए बाहर निजी जांच घरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सकलडीहा स्थित तीस बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का शिलान्यास वर्ष 1995 में पूर्व राज्यमंत्री दीनानाथ भाष्कर व धानापुर विधायक रामजीत भारद्वाज ने किया था। अस्पताल के शिलान्यास के साथ ही लोगों में इस बात की उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें उनके क्षेत्र में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। अस्पताल निर्माण के बाद इसमें 36 नियमित व 30 संविदा पर कर्मचारी तैनात किए गए। यहां दो महिला चिकित्सक भी तैनात हैं। एक बाल रोग विशेषज्ञ भी है। लेकिन आंख की जांच के लिए अभी तक किसी भी चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। अस्पताल में आने वाले मरीजों को एक्सरे व ईसीजी के लिए प्राइवेट सेंटरों पर जाना पड़ता है। जबकि यहां मशीनें हैं।
सकलडीहा। स्थानीय कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक्सरे और ईसीजी की मशीन होने के बाद भी लोगों को टेक्नीशियन के अभाव में बाहर जाना पड़ता है। वहीं अस्पताल जाने वाले मरीजों को आवश्यक सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है। कस्बा निवासी दिलीप गुप्ता ने कहा कि अस्पताल पर मरीज को कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। अस्पताल में परेशानी होने के बाद भी यहां शिकायत सुनने वाला भी कोई नहीं है। चतुर्भुजपुर निवासी संतोष कुमार जायसवाल ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सक द्वारा ठीक से ध्यान नहीं दिए जाने से कई बार बेहतर उपचार नहीं मिल पाता है। बाद में प्राइवेट क्लीनिक पर जाकर उपचार कराना पड़ता है। नरैना निवासी राधेश्याम पांडेय ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर सफाई भी काफी लचर है। खड़ेहरा गांव निवासी हाजी जोखू सिद्दकी ने कहा कि सरकारी सुविधा गरीबों को नहीं मिल पाती है। जांच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है। एक्सरे मशीन तो है लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने से समस्या होती है। नेत्र चिकित्सक की तैनाती व ईसीजी की सुविधा शुरू किए जाने के लिए सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है - डा. योगेन्द्र दास, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी सकलडीहा
अस्पताल में जांच मशीने उपलब्ध फिर भी मरीजों को जेब करनी पड़ रही है ढीली
डिजिटल एक्सरे और ईसीजी मशीन टेक्नीशियन के अभाव में फांक रही है धूल