टांडाकला। गंगा में देशी मछलियों के अस्तित्व और मछुआरों की आजीविका पर बढ़ते खतरे को देखते हुए मत्स्य विभाग लखनऊ की वैज्ञानिक टीम ने टांडाकला घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने गंगा में विदेशी प्रजाति की मछलियों के बढ़ते प्रभाव का अध्ययन करने के साथ स्थानीय मछुआरों को जागरूक किया।
टीम का नेतृत्व कर रहे प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शरद कुमार सिंह ने बताया कि हेलिकॉप्टर मछली, क्रोकोडाइल फिश, सकर माउथ कैटफिश और बिल्ली मछली के नाम से पहचानी जाने वाली विदेशी प्रजाति गंगा के जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। यह आक्रामक प्रजाति तेजी से फैल रही है। इसके कारण रोहू और भाकुर जैसी देशी मछलियों के अंडे और बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। इससे देसी मछलियों की संख्या घटने के साथ मछुआरों की आजीविका पर भी संकट बढ़ सकता है।
डॉ. शरद कुमार सिंह ने मछुआरों से देशी मछलियों के संरक्षण में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जाल में सकर माउथ कैटफिश फंसने पर उसे दोबारा नदी में न छोड़ें। उन्होंने कहा कि विदेशी प्रजाति के प्रसार को रोकना देसी मछलियों के संरक्षण और मछुआरों की आजीविका के लिए जरूरी है। इस दौरान डॉ. विकास कुमार साहू, दर्शन निषाद, अनिल निषाद, उमा निषाद, झगड़ु निषाद, चंदे निषाद, विलास निषाद, विजय निषाद और जितेंद्र निषाद आदि मौजूद थे